केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा है कि गंगा नदी का संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था, और लाखों लोगों की जीवन रेखा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
नई दिल्ली में आयोजित गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्यबल की 16वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए, श्री पाटिल ने गंगा संरक्षण के लिए किए गए अब तक के कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कार्यबल द्वारा उठाए गए करीब 80% मुद्दों का सफल समाधान किया जा चुका है।
प्रमुख बिंदु:
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उत्तर प्रदेश में 282 और बिहार में 387 आर्द्रभूमियों (wetlands) का मूल्यांकन किया गया।
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इनमें से उत्तर प्रदेश की 40 और बिहार की 19 आर्द्रभूमियों को उच्च प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा गया।
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मंत्री ने दोनों राज्यों से इन 59 आर्द्रभूमियों को जल्द अधिसूचित कर उन्हें कानूनी सुरक्षा देने का आग्रह किया।
नीतिगत पहलें:
बैठक में गंगा संरक्षण के लिए नियामक ढांचे को मज़बूत करने, बाढ़ के मैदानों के सीमांकन, और संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे अहम विषयों पर चर्चा की गई।
श्री पाटिल ने सभी गंगा बेसिन राज्यों से केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी दिशानिर्देशों को लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह दिशा-निर्देश गंगा और उसकी सहायक नदियों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।
उपस्थित प्रतिनिधि:
बैठक में एनएमसीजी (राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन), विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, और अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
निष्कर्ष:
केंद्रीय मंत्री ने सभी पक्षों से गंगा संरक्षण में संपूर्ण और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की, ताकि गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता, प्रवाह और पारिस्थितिकी संतुलन को सुनिश्चित किया जा सके।
