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पश्चिम एशिया संकट को प्रधानमंत्री ने चिंताजनक बताया, राष्ट्रीय एकजुटता का किया आह्वान

Date : 23-Mar-2026

 नई दिल्ली, 23 मार्च । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष को चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह संकट भारत के लिए आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय स्तर पर गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहा है। उन्होंने संसद और देश से इस मुद्दे पर एकजुट होकर प्रतिक्रिया देने का आह्वान किया, ताकि वैश्विक मंच पर भारत की स्पष्ट और मजबूत आवाज पहुंच सके।

प्रधानमंत्री ने सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया सैन्य संघर्ष और इसकी वजह से भारत के समक्ष चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और विदेश मंत्री तथा पेट्रोलियम मंत्री द्वारा संसद को समय-समय पर जानकारी दी जा चुकी है।

मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से देश की बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है, वहीं यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार मार्गों के लिहाज से भी अहम है। खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जबकि समुद्री जहाजों में भी बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य कार्यरत हैं। ऐसे में इस संकट का भारत पर प्रभाव स्वाभाविक रूप से अधिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। ईरान से करीब 1000 भारतीयों को निकाला गया है, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं। विदेशों में स्थित भारतीय मिशन 24 घंटे काम कर रहे हैं और प्रभावित नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।

ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बावजूद सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विविधीकृत किया है। साथ ही देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने एलपीजी की घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा इथेनॉल ब्लेंडिंग, रेलवे विद्युतीकरण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे कदमों से तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। भारत अब पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है।

कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है और किसानों को किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया है और आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया है। साथ ही नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ऊर्जा और बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार है और सरकार हर स्तर पर निगरानी कर रही है। भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 250 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें सौर ऊर्जा का बड़ा योगदान है।

कूटनीतिक प्रयासों पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत शुरू से ही शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। मोदी ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देश के राष्ट्र अध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बातचीत कर तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिक और वाणिज्यिक ढांचे पर हमलों का विरोध किया है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है, इसलिए देश को धैर्य, संयम और एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा। भारत ने पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना एकजुट होकर किया है और इस बार भी देश इसी भावना के साथ हर चुनौती का मुकाबला करेगा।

प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे संकट के समय कुछ तत्व गलत सूचनाएं फैलाने और जमाखोरी जैसे कार्यों में संलिप्त हो सकते हैं। उन्होंने राज्यों से अपील की कि ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी रखी जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि देश की हर सरकार और देश का हर नागरिक जब मिलकर चलेंगे, तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं।


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