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आठ अखाड़ों के समर्थन के साथ पुरी बोले मैं अखाड़ा परिषद अध्यक्ष

Date : 23-Mar-2026

 हरिद्वार/उज्जैन, 23 मार्च। उज्जैन में सिंहस्थ (कुम्भ) से पहले अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर फिर से विवाद उभर आया है। 13 अखाड़े दो गुटों में बंटे हैं। 8 अखाड़ों के समर्थन से रविंद्र पुरी (महानिर्वाणी अखाड़ा) ने खुद को परिषद का अध्यक्ष बताया, जबकि दूसरे गुट ने अलग दावा किया।

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है तो वहीं दूसरी और साधु संतों में दो फाड़ नजर आ रहे है। 13 अखाड़ों में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

बीते रोज रविवार को उज्जैन के मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। संतों के इस समागम में 13 में से 8 अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। यहां हरिद्वार से आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने संतों के साथ चर्चा वार्ता की।

रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि वे स्वयं वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से 8 अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं।

कुल 13 अखाड़े में से जिन 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है, उनमें महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, नया उदासीन अखाड़ा, बड़ा उदासीन अखाड़ा, निर्वाणी अणि अखाड़ा, दिगंबर अणि अखाड़ा और निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है।

रविन्द्र पुरी ने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय-समय पर अधिकारियों से चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।

कुल मिलाकर 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मान रहा है तो दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष की मान्यता देता है। संयोग की बात यह है कि अध्यक्ष पद पर दावा कर रहे दोनों ही संतों का नाम रविंद्र पुरी है।


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