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देश में पिछले 75 वर्ष से नियोजन की कमी रही हैः के. चंद्रशेखर राव

Date : 16-Jun-2023

नागपुर। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष एवं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि देश में स्वाधीनता के 75 वर्षों में नियोजन की कमी रही है।

महाराष्ट्र के नागपुर में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेस में के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने कहा कि देश में बिजली और पानी का निजीकरण बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इस तरह के निजीकरण से सरकार को नुकसान होता है। केसीआर ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली और पानी जैसी चीजों का निजीकरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अगले 150 वर्षों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है।

केसीआर ने कहा कि हमारे पास योजना की कमी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हम कृषि प्रधान देश होते हुए भी दाल और तेल का आयात क्यों करते हैं..? उन्होंने कहा कि इस देश में पानी का अधिशेष है और इसका 80 प्रतिशत समुद्र में समा जाता है। इस पानी का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो देश में पानी की कमी नहीं होगी।

केसीआर ने बताया कि देश की जल नीति को पूरी तरह से बदलने की जरूरत है। इस दिशा में पंडित नेहरू के समय में कुछ प्रयास किए गए थे लेकिन बाद की किसी भी सरकार ने इस दिशा में प्रयास नहीं किए।

बीआरएस किसी की 'बी-टीम' नहीं है

केसीआर ने कहा कि बीआरएस देश में आमूलचूल परिवर्तन चाहती है। पार्टी को इस बदलाव के लिए कोई हड़बड़ी नहीं है। केसीआर ने कहा कि देश में किसी भी नई पार्टी को 'ए', 'बी' या 'सी' शब्दों के रूप में उपहास करना फैशन बन गया है लेकिन हमें इसकी परवाह नहीं। हमें इससे भी कोई दिक्कत नहीं है कि हमारी वजह से किसे फायदा होता है या किसे नुकसान। हम लड़ेंगे आमूलचूल परिवर्तन के लिए।

केसीआर ने कहा कि राजनीति परिवर्तन का साधन है। हम देश में गुणात्मक परिवर्तन लाना चाहते हैं। अलग-अलग मोर्चों के विकल्प पहले भी कई बार तलाशे जा चुके हैं। हमारा एजेंडा विकास और गुणात्मक परिवर्तन का है। उन्होंने कहा कि हम उन लोगों से अपील करेंगे जो हमारे एजेंडे से सहमत हैं। जो हमसे सहमत होंगे वह हमारे साथ जाएंगे।

संतों को मठ में पूजा करनी चाहिए

समान नागरिक संहिता पर केसीआर ने कहा कि इससे साधू-संतों का कोई लेना-देना नहीं है। केसीआर ने समान नागरिक संहिता को लेकर साधू-संतों की राय पूछे जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को मठ में रहकर पूजा करनी चाहिए।


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