भोपाल, 16 जून । देशभर में इन दिनों जी-20 से जुड़ी अलग-अलग विषयों की बैठकें जारी हैं। इसी के अंतर्गत राजधानी भोपाल में "कनेक्टिंग साइंस टू सोसायटी एंड कल्चर" थीम पर दो दिवसीय साइंस-20 (एस-20) सम्मेलन का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ जिसमें मुख्य तौर पर जी-20 सदस्य देशों के आमंत्रित और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 25 प्रतिभागियों समेत कुल 80 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में दो मुख्य सत्रों के दौरान शिक्षा और कौशल, कानून और शासन, विरासत और संस्कृति के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित गहन विमर्श हुआ है। चर्चा भी मुख्य रूप से फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज, सोसायटीज ऑफ द फ्यूचर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर सोसाइटी एंड कल्चर पर केंद्रित थी। उक्त बातें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने पत्रकारों के बीच बातचीत के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और नीति निर्माताओं की इस बैठक में उन विषयों पर बहुत व्यापक चर्चा हुई है जो विज्ञान को समाज और संस्कृति से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण हैं। आज के सत्रों में हमने शिक्षा, कानून, शासन, संस्कृति और विरासत पर चर्चा की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ और प्रभाव पर की गई चर्चा आज प्रमुख रूप से केंद्र में रही। शिक्षा के विविध आयामों को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ है, जिसके बाद एआई के उपयोग और ट्रांस-डिसिप्लिनरिटी के दृष्टिकोण से स्वीडन के उदाहरण पर व्याख्या की गई।
प्रो. आशुतोष शर्मा ने बताया कि कानून और शासन पर हुए सत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कानूनी प्रणालियों और शासन नेटवर्क में हस्तक्षेप पर प्रकाश डाला गया है जिसका सार यह है कि यदि आपको किसी मामले में गहन पड़ताल करनी है और उससे जुड़े कई प्रकरणों के अध्ययन एवं परिणामों का निचोड़ निष्कर्ष के रूप में चाहिए तो ऐसे में एआई आपको चंद मिनटों में वह प्रदान कर देती है। आने वाले समय में यह अत्यधिक प्रभावित होगी एवं इंसान का जीवन विज्ञान पर पूरी तरह से निर्भर होता हुआ दिखाई देगा, किंतु इसकी कुछ चुनौतियां भी हैं जिनसे हमारे समाज को निपटना होगा, तो वह चुनौतियां क्या होंगी, आज की इस एस-20 की बैठक में उस पर भी गहराई से विचार किया गया है।
प्रो. शर्मा ने बताया कि सम्मेलन के प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मेरे द्वारा की गई जिसमें मुख्य रूप से चर्चा की गई कि विज्ञान का लक्ष्य समाज के साथ मिलकर अधिक संवहनीय, समावेशी एवं न्यायसंगत भविष्य का निर्माण करना है। इसके साथ ही विज्ञान एवं संस्कृति परस्पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में विज्ञान हमारी प्राचीनतम संस्कृति के विस्तार में कैसे सहायक हो सकता है, इस पर कई विचार सामने आए।
इंडोनेशिया के प्रो. अहमद नजीब बुरहानी ने समावेशी वैज्ञानिक विकास के लिए समाज के सभी अंगों विशेषकर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए वैश्विक समुदाय को प्रयास करने जोर दिया। उन्होंने इंडोनेशिया के मेडिसिनल प्लांट, परंपरागत कृषि पद्धति तथा समुद्री इकोसिस्टम को संरक्षित कर मत्स्यपालन के परंपरागत “सासी पद्धति” का उल्लेख किया।
ब्राज़ील के प्रतिनिधि प्रो. रुबेन ओलिवन ने कहा कि सामाजिक समस्याओं को आधार मानकर विकास की नीतियों का निर्माण किया जाना चाहिये। प्रो. ओलिवन ने ब्राज़ील में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
इसके अलावा मुख्यत: जो आकर्षण का केंद्र था वह पद्मविभूषण से सम्मानित डॉ. राजगोपाल चिदंबरम का उद्बोधन। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय को सफल परिणामों की सुनिश्चितता के इंतजार में न रहकर प्रयास करते रहना चाहिए। वैश्विक समुदाय आपसी सहयोग से ही सामुदायिक समस्याओं से निजात पा सकता हैं। प्रो. चिदंबरम ने दिव्यांगों के सहयोग के लिए आईआईटी दिल्ली और चेन्नई में बाढ़ पूर्वानुमान एवं प्रबंधन के लिए आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से तैयार सी-फ्लो (C-Flows) तकनीकी का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि 12 देशों से यहां 25 वैज्ञानिक प्रतिनिधि आए हैं। प्रोफेसर उदय बी देसाई, आलोक श्रीवास्तव, भरत लाल, सचिन चतुर्वेदी, लर्वी ग्लेडहिल (साउथ अफ्रिका), शारदा श्रीनिवासन, शांति पप्पू (यूके), समीर चौहान (यूएनआईसीसी) खालिद अलमुजैनी (सऊदी अरब), इवान डैनिलिन (रूस), चुनलियांग फैन (चीन), शांतनु चौधरी , हेमंत दरबारी, अजय प्रकाश श्ह्ने, संजीव सान्याल, उदय देसाई, अर्चना शर्मा, अनुराग अग्रवाल, आशीष महाबल, तरुण सौरदीप, डोंगयाओ वांग (चीन), टिमोफेई नेस्टिक (रूस), अनुपमा मल्लिक, नरिंदर मेहरा, रूबल नागी, शेखर मंडे, अजीत केंभवी, चिंतन वैष्णव, स्पेंटा वाडिया ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखें एवं आपसी संवाद किया।
उल्लेखनीय है कि साइंस-20, जी-20 का एक साइंस एंगेजमेंट वर्टिकल है, जिसे वर्ष 2017 में जर्मनी की अध्यक्षता के दौरान स्थापित किया गया था। इसमें सभी जी-20 देशों की वैज्ञानिक अकादमियां शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रहे जी-20 में इंडोनेशिया और ब्राजील, भारत के साथ ट्रोइका सदस्य हैं। साइंस-20 इंगेजमेंट ग्रुप का मुख्य उद्देश्य नीति निर्माताओं को आम सहमति पर आधारित विज्ञान-संचालित अनुशंसा करना है।
