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नवरात्रि में मां समलेश्वरी के दरबार में उमड़ी आस्था, तिथि अनुसार विशेष भोग

Date : 24-Mar-2026

 जांजगीर-चांपा, चांपा शहर स्थित मां समलेश्वरी मंदिर नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। जमींदार परिवार द्वारा स्थापित इस मंदिर की महिमा अत्यंत निराली मानी जाती है। मान्यता है कि नवदाम्पत्य जीवन की शुरुआत से पहले हर जोड़ा यहां आकर माता के चरणों में शीश नवाता है और मां समलेश्वरी का आशीर्वाद लेकर ही अपने नए जीवन की शुरुआत करता है।

नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में तिथि अनुसार माता को विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका धार्मिक महत्व भी अलग-अलग माना गया है। प्रतिपदा को घी का भोग लगाने से रोगों से मुक्ति मिलती है, द्वितीया को शक्कर का भोग दीर्घायु प्रदान करता है, तृतीया को दूध का भोग दुखों का नाश करता है और चतुर्थी को मालपुआ अर्पित करने से विघ्न और क्लेश दूर रहते हैं। पंचमी को केले का भोग बुद्धि और कौशल में वृद्धि करता है, षष्ठी को मधु से शांति मिलती है, सप्तमी को गुड़ का भोग शोक दूर करता है, अष्टमी को नारियल अर्पित करने से मानसिक ताप शांत होता है और नवमी को लाई का भोग लोक-परलोक में सुख-समृद्धि प्रदान करता है। महाअष्टमी की रात्रि में माता को नींबू की माला अर्पित करने की विशेष परंपरा भी यहां निभाई जाती है।

इसी कड़ी में चैत्र नवरात्र के अवसर पर 25 मार्च 2026, बुधवार को मां कालरात्रि पूजन का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह पूजन रात्रि 11:00 बजे से मां समलेश्वरी मंदिर परिसर में संपन्न होगा। आयोजन के दौरान महानिशा पूजन किया जाएगा तथा माता को विशेष रूप से नींबू की माला अर्पित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार इस पूजन से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल, शत्रु बाधाओं से मुक्ति और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

मंदिर के इतिहास की जानकारी पंडित अतुल द्विवेदी ने देते हुए बताया कि वर्ष 1760 में तत्कालीन जमींदार विश्वनाथ सिंह द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। उस समय हसदेव नदी का पूर्वी भाग ओडिशा के संबलपुर रियासत के अधीन था, जबकि पश्चिमी भाग रतनपुर रियासत में आता था। दोनों रियासतों के बीच हुए युद्ध में चांपा जमींदार परिवार के पूर्वजों ने रतनपुर का साथ दिया, जिसके बाद विजय के पश्चात यह क्षेत्र उन्हें प्रदान किया गया और चांपा जमींदारी की स्थापना हुई। इसके बाद धार्मिक आस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से संबलपुर की प्रसिद्ध समलेश्वरी देवी का मंदिर चांपा में बनवाया गया और उन्हें कुलदेवी के रूप में स्थापित किया गया।

आज भी चैत्र और क्वांर नवरात्रि में यहां मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं और जवारा विसर्जन की अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां समलेश्वरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर मां कालरात्रि पूजन में शामिल हों और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।


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