बांग्लादेश की पहली राष्ट्रीय एमपीआई रिपोर्ट में बाल गरीबी की गंभीर तस्वीर सामने आई: यूनिसेफ | The Voice TV

Quote :

"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

International

बांग्लादेश की पहली राष्ट्रीय एमपीआई रिपोर्ट में बाल गरीबी की गंभीर तस्वीर सामने आई: यूनिसेफ

Date : 01-Aug-2025

यूनिसेफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि बांग्लादेश की पहली राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) रिपोर्ट ने देश में विशेष रूप से बच्चों और पूर्वी क्षेत्रों के लोगों की गरीबी की सच्चाई को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दस में से लगभग तीन बच्चे (28.9%) बहुआयामी गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो कि वयस्कों की दर (21.44%) से कहीं अधिक है। यह अंतर इस ओर इशारा करता है कि गरीबी की मार बच्चों पर अधिक गंभीर रूप से पड़ रही है।

यह सूचकांक जनरल इकोनॉमिक्स डिवीजन (जीईडी) द्वारा यूनिसेफ और यूरोपीय संघ (EU) के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में गंभीर अभावों को रेखांकित किया गया है, जो उनके अधिकारों और विकास क्षमताओं को प्रभावित कर रहे हैं।

एमपीआई के अनुसार, बांग्लादेश में 3.9 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी में हैं। भले ही आर्थिक गरीबी और बौनेपन की दर में कुछ गिरावट आई हो, लेकिन बच्चों के बीच बहुआयामी गरीबी अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण बच्चों को शहरी बच्चों की तुलना में अधिक गरीबी का सामना करना पड़ता है। स्कूल में उपस्थिति एमपीआई में सबसे बड़ा कारक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा की कमी बाल गरीबी का मुख्य कारण है।

क्षेत्रीय असमानताएं भी रिपोर्ट में उजागर हुई हैं। पांच जिलों — बंदरबन, कॉक्स बाज़ार, सुनामगंज, रंगमती और भोला — में 40% से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी में हैं। इनमें बंदरबन जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ यह दर 65.36% है, जबकि सिलहट डिवीजन में औसत 37.70% है।

उच्च मुद्रास्फीति, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय की कमी और हाल की नागरिक अशांति जैसे कारक गरीबी से निपटने के प्रयासों को बाधित कर रहे हैं।

यूनिसेफ ने बांग्लादेश की मौजूदा और भविष्य की सरकारों व भागीदारों से अपील की है कि वे एमपीआई डेटा का उपयोग कर न्यायसंगत नीति निर्माण, लक्षित निवेश और आवास, इंटरनेट, स्वच्छता और आवश्यक घरेलू संसाधनों की पहुंच बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएं ताकि बाल गरीबी को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement