भारत ने नेपाल में चावल के संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सहयोग से एक नई सहयोगात्मक पहल की शुरुआत की है। यह पहल भारत-संयुक्त राष्ट्र वैश्विक क्षमता निर्माण पहल का हिस्सा है, जिसकी औपचारिक शुरुआत 1 अगस्त 2025 को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में की गई।
इस परियोजना का उद्देश्य नेपाल में पोषक तत्वों से समृद्ध चावल की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी बनाना है, विशेष रूप से खरीद प्रक्रियाओं, डेटा संग्रह और कुशल कार्यबल की कमी जैसे क्षेत्रों में सुधार कर। इसके अंतर्गत भारत की सफल सार्वजनिक वितरण प्रणाली से सीखे गए अनुभवों को साझा किया जाएगा, जिससे नेपाल डिजिटल तकनीकों के माध्यम से अपने खाद्य आपूर्ति तंत्र को सशक्त बना सकेगा।
परियोजना के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित होंगे:
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लाभार्थी प्रबंधन
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भंडारण और वितरण मॉडल
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निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणालियाँ
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शिकायत निवारण तंत्र
यह परियोजना 12 महीनों में तीन चरणों में क्रियान्वित की जाएगी:
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प्रथम चरण: आवश्यकताओं का आकलन और हितधारकों की सहभागिता।
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द्वितीय चरण: नेपाली अधिकारियों का भारत अध्ययन दौरा, जिसमें व्यावहारिक प्रस्तुतियाँ और विशेषज्ञ ब्रीफिंग शामिल होगी।
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तृतीय चरण: परियोजना के लिए एक विस्तृत कार्य योजना का विकास।
इस पहल का प्रशिक्षण घटक भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। ITEC के तहत 2001 से अब तक 3,000 से अधिक नेपाली अधिकारियों ने भारत में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
भारत-संयुक्त राष्ट्र वैश्विक क्षमता निर्माण पहल की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र (सितंबर 2023) में की गई थी। इसके बाद, भारत का विदेश मंत्रालय और भारत में संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीम, सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में तेजी लाने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
नेपाल में चावल संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की यह परियोजना, इस पहल के अंतर्गत पहचानी गई चार प्रमुख परियोजनाओं में से एक है।
यह सहयोग न केवल भारत और नेपाल के बीच गहरे विकासात्मक संबंधों को रेखांकित करता है, बल्कि यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से टिकाऊ और सुदृढ़ खाद्य प्रणालियों के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
गौरतलब है कि पिछले वित्तीय वर्ष में नेपाल ने भारत से 5 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का आयात किया था, जबकि 2023 में बासमती और गैर-बासमती चावल मिलाकर यह आंकड़ा 8 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया। इस परियोजना के तहत चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की फोर्टिफिकेशन से नेपाल की कमजोर आबादी को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेंगे और कुपोषण जैसी समस्याओं को कम किया जा सकेगा।
