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संपूर्ण विश्व के साझा भविष्य से जुड़ा मुद्दा है जलवायु परिवर्तन : बिरला

Date : 12-Oct-2023

 नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के साझा भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए संपूर्ण विश्व को इस पर एक मत से विचार करने की जरूरत है। वह गुरुवार को दिल्ली में दो दिवसीय जी20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन (पी20 शिखर सम्मेलन) के 9वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसा विषय है, जो पूरी दुनिया के साझा भविष्य से जुड़ा है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि पर्यावरण से संबंधित विषयों को लेकर पी20 में चर्चा करने के लिए हम एकत्र हुए हैं। आज हम इस प्री-समिट में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। भारतीय संस्कृति में तो पर्यावरण को मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। हम पर्यावरण को आदर देते हैं। यह हमारे संस्कार और संस्कृति का हिस्सा है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया कि जो प्रकृति की रक्षा करता है, प्रकृति उसकी भी रक्षा करती है।

बिरला ने कहा कि बदले परिप्रेक्ष्य में आज दुनिया का कोई भी देश जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से अछूता नहीं है। हम विश्व के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से अवगत हैं। इसलिए इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाने की जरूरत है। पर्यावरण संरक्षण के विषय पर प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण के लिए दिनचर्या में सुधार का विचार विश्व के सामने रखा है। विषम दिनचर्या पर्यावरण संरक्षण का व्यापक दृष्टिकोण है। जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल का व्यवहार अपनाने की प्रेरणा देती है। ऐसे में हम लोगों को ऐसा दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि दिनचर्या मिशन ने हमें जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसी समकालीन चुनौतियों ने निपटने का नया मार्ग दिया है। यह विचार आज एक वैश्विक आंदोलन बन गया है। दुनिया इसके बारे में सोच रही है। भारत की संसद में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि सभी को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना होगा। हमें पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनानी होगी।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि आठ बिलियन वैश्विक आबादी में से यदि एक बिलियन लोग अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार अपनाते हैं तो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के लगभग 20 फीसदी की गिरावट आ सकती है। ऐसे में हमें इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। दुनिया के सभी देशों में इस मुद्दे पर अभियान चलाने की जरूरत है। दिनचर्या में सुधार को लेकर एक वैश्विक आंदोलन की जरूरत है। इसके लिए सभी देशों को साझा प्रयास करना होगा।


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