रामेश्वरम, 24 जनवरी। नया पाम्बन पुल बनकर उपयोग में आ चुका है। इसके चलते अगले 4 महीनों के भीतर पुराने पाम्बन रेल पुल को हटाने का कार्य तेज़ कर दिया गया है।
तमिलनाडु के मंडपम मुख्य भूमि और रामेश्वरम द्वीप को जोड़ने में पाम्बन रेल पुल और इंदिरा गांधी सड़क पुल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1914 में पाम्बन रेल पुल (शेर्ज़र्स ब्रिज) का उद्घाटन हुआ था और उसी के साथ रेल यातायात शुरू हुआ। यह भारत में समुद्र के बीच बना पहला रेल पुल है।
जहाज़ों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए इस पुल में रेलवे ट्रैक के बीच एक लिफ्ट ब्रिज बनाया गया था, जो इसकी विशेषता रही है। 1964 में आए चक्रवात में यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इसका पुनर्निर्माण कर फिर से उपयोग में लाया गया।
100 वर्षों से अधिक पुराने इस पुल में बार-बार तकनीकी समस्याएं आने लगीं। इसके चलते वर्ष 2019 में नए पुल की आधारशिला रखी गई और 2020 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। पाँच वर्षों तक चले निर्माण कार्य के बाद, पिछले वर्ष 6 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए पाम्बन रेल पुल का उद्घाटन किया।
अब रेलवे प्रशासन ने पुराने पाम्बन पुल को हटाने का निर्णय लिया है। रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने अगस्त महीने में 2.3 किलोमीटर लंबे इस पुल के बीच स्थित लिफ्ट ब्रिज, गर्डर ब्रिज और रेलवे ट्रैक को 2.53 करोड़ रुपये की लागत से हटाने के लिए निविदा जारी की थी।
निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब भूमि पूजन किया गया है और अगले चार महीनों में कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। चूंकि यह पुल ऐतिहासिक महत्व का है इसलिए इसे हटाते समय क्षति से बचाने के लिए पुल को चरणबद्ध तरीके से काटकर हटाने का निर्णय लिया गया है।
इसके लिए पुल के विभिन्न हिस्सों पर क्रम संख्या अंकित की गई है। अगले महीने से कर्मचारियों द्वारा चरणबद्ध रूप से पुल हटाने का कार्य शुरू किया जाएगा। 111 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पाम्बन लिफ्ट ब्रिज को समुद्र से निकाल कर रेलवे संग्रहालय में रखने जाने की तैयारी है।
