"वो सब अपराधी हैं,जिन्होंने आपको विस्मृत किया"
महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी-सरदार भगत सिंह के क्रांतिकारी गुरु महा महारथी श्रीयुत शचीन्द्रनाथ सान्याल का जन्म 3 अप्रैल 1893 बनारस, उत्तर प्रदेश, ब्रिटिश भारत में हुआ था। आपके पिताश्री का नाम हरिनाथ सान्याल और माताश्री का नाम वासिनी देवी था।
वर्ष 1937-1938 में कांग्रेस मंत्रिमंडल के प्रयासों से जब राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया तो उसमें शचीन्द्रनाथ भी रिहा हो गये, लेकिन उन्हें घर पर ही नजरबंद कर दिया गया। कठिन परिश्रम, कारावास और फिर चिन्ताओं से वे क्षय रोग से ग्रस्त हो गये और जब खून की उल्टियाँ होने लगीं, तो उन्हें मरने के लिए रिहा कर दिया गया। गोरखपुर में 7 फरवरी सन् 1942 में भारत का यह महान् क्रांतिकारी जर्जर शरीर के साथ चिर निद्रा में सो गया।
जिस नगर में उनकी सांसों की डोर टूटी,वे वहीं विस्मृत हैं, उस नगर में उनके नाम पर न कोई सड़क है, न चौराहा और न ही कोई स्मारक। यहाँ तक कि उनका घर भी बिक चुका है। हम तो उनकी यादों को दिल में संजोए हैं पर हमारे वीर सपूत की नगर में गुमनामी उन्हें दर्द देती है।इस से भी भयानक यह है कि वामपंथी तथा एक दल विशेष के समर्थक परजीवी इतिहासकारों ने उनका यदाकदा नामोल्लेख कर जो दर्द दिया है वो तो नासूर है। परंतु अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सुध ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर तीन करोड़ रुपये खर्च कर क्रांतिकारी सचींद्र नाथ सान्याल का घर पर्यटन केंद्र बनेगा। इसके लिए शासन को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक घर में म्यूजियम व लाइब्रेरी बनाई जाएगी।कार्य प्रगति पर है।
लेखक - डॉ आनंद सिंह राणा
