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सीमा अतिक्रमण वाले बयान पर बालेन्द्र शाह अडिग, जरूरत पड़ी तो संसद में देंगे जवाब

Date : 02-Jun-2026

 काठमांडू, 02 जून । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह विपक्षी दलों के माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग को ठुकराते हुए अपनी बात पर कायम हैं। उनकी तरफ से कहा गया है कि संसद में दिया गया बयान सोच समझकर ही दिया गया है।

सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने कहा है कि नेपाल-भारत सीमा विवाद समेत विभिन्न मुद्दों पर आवश्यकता पड़ने पर प्रधानमंत्री बालेन शाह दोबारा संसद में उपस्थित होकर जवाब देने के लिए तैयार हैं। मंगलवार को मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पोखरेल ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह हैं। वह पहले भी सदन में उपस्थित होकर जवाब दे चुके हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने के पक्ष में है तथा इस दिशा में दोनों देशों के बीच स्थापित प्रक्रियाएं सक्रिय हैं।

सरकारी प्रवक्ता पोखरेल ने प्रधानमंत्री के बयान का बचाव करते हुए कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां वर्तमान में भारत के उपयोग में लाई जा रही भूमि नेपाल की सीमा में पड़ सकती है, जबकि कुछ ऐसे भारतीय क्षेत्र भी हो सकते हैं, जिनका उपयोग नेपाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इसी वास्तविकता का उल्लेख किया था। पोखरेल के अनुसार यह जानकारी नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए गठित द्विपक्षीय तंत्र और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दौरान सामने आई थी। उन्होंने बताया कि स्वयं प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यह जानकारी सुनकर उन्हें आश्चर्य हुआ था।

सरकार का कहना है कि नेपाल-भारत सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच स्थापित कूटनीतिक तंत्र और संवाद प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। प्रवक्ता पोखरेल ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवादों के समाधान के लिए विभिन्न तंत्र पहले से मौजूद हैं। प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सीमा संबंधी मुद्दों को किस प्रकार सुलझाया जाना चाहिए। इस विषय में नेपाल ने भी कूटनीतिक नोट भेजा है और भारत ने भी अपनी ओर से नोट भेजा है। दोनों देश आपसी वार्ता के माध्यम से सभी सीमा विवादों का समाधान करेंगे।

प्रधानमंत्री शाह के हाल ही में संसद में दिए गए उस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेपाल ने भारत की कुछ भूमि पर अतिक्रमण किया है। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न वर्गों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।


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