सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। माघ माह में आने वाली एकादशी को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
इस व्रत का बड़ा ही धार्मिक महत्व है। इस उपवास को लेकर ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इसे सच्चे भाव के साथ करते हैं उन्हें भूत, प्रेत और पिशाच की योनि में नहीं जाना पड़ता है। साथ ही पिछले जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए भक्तों को यह व्रत करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में सभी को जगत के पालन हार श्री हरि विष्णु की पूजा सच्चे दिल से करनी चाहिए। ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो सके।
तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह शुक्ल पक्ष की एकादशी 19 फरवरी, 2024 को सुबह 08 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 20 फरवरी, 2024 सुबह 09 बजकर 55 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदयातिथि का खास महत्व है इसलिए एकादशी का व्रत 20 फरवरी दिन मंगलवार को रखा जाएगा।
जया एकादशी की व्रत कथा
और देवता गण सुखपूर्वक रह रहे थे. एक बार इंद्र देव अप्सराओं के साथ सुंदरवन में विहार करने गए. उनके साथ गंधर्व भी थे. उसमें अप्सरा पुष्पवती और गंधर्व माल्यवान भी थे.
उस दौरान पुष्पवती ने माल्यवान को देखा और उस पर मोहित हो गई. माल्यवान ने भी उसे देखा और वह भी उसके सौंदर्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया. वे दोनों इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए नृत्य और गायन कर रहे थे. लेकिन वे दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित थे, इसलिए उनका मन विचलित था.
इंद्रदेव ने माल्यवान और पुष्पवती के प्रेम को समझ लिया क्योंकि वे दोनों ही अपने काम में ध्यान नहीं दे पा रहे थे. इंद्र ने इसे अपना अपमान समझकर माल्यवान और पुष्पवती को श्राप दे दिया. उन्होंने कहा कि तुम दोनों अभी से स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर रहोगे और वहां पर पिशाच योनि में कष्ट भोगोगे. श्राप के कारण माल्यवान और पुष्पवती हिमालय पर आ गए और पिशाच योनि में कष्टप्रद जीवन व्यतीत करने लगे.
एक दिन माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी आई. माल्यवान और पुष्पवती ने उस दिन कुछ भी अन्न नहीं खाया और फल फूल पर दिन व्यतीत किया. सूर्यास्त के समय वे पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर रात बिताए. उस रात सर्दी के कारण वे सो नहीं सके, जिससे उनका रात्रि जागरण हो गया. जया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से सुबह होते ही वे पिशाच योनि से मुक्त हो गए.
भगवान विष्णु की कृपा से उन दोनों ने सुंदर शरीर प्राप्त किया और वे स्वर्ग लोक चले गए. उन दोनों ने देवराज इंद्र को प्रणाम किया. उनको देखकर इंद्र चौंक गए और पिशाच योनि से मुक्ति का उपाय पूछा. तब माल्यवान ने बताया कि भगवान विष्णु की कृपा और जया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से उन दोनों को पिशाच योनि से छुटकारा मिला है.
इस प्रकार से जो भी व्यक्ति जया एकादशी व्रत रखता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. वह अपने व्रत के पुण्य को पितरों को दान कर सकता है ताकि कोई पिशाच, भूत या प्रेत योनि में हो तो उसे मुक्ति मिल सके.
