आधी दुनिया के देशों से मूल निवासियों का सफाया कर अब मूल निवासी दिवस की आड़ में मिशनरियों का भारत है निशाना "
Date : 08-Aug-2024
अब चाहे ये पोस्ट प्रतिबंधित हो जाए तो भी 9 अगस्त को विश्व मूल निवासी दिवस मनाए जाने का विरोध करते हुए मिशनरियों के भारत के विरुद्ध विश्व व्यापी षडयंत्र का खुलासा करुंगा
वसुधैव "जय सेवा.जय जोहार.सेवा जोहार -का मूल-कोयापुनेम (मानव धर्म और प्रकृति की शाश्वतता)में निहित है,जो" वसुधैव कुटुम्बकम् "के रुप में भारतीय संस्कृति का अमृत तत्व है। "शम्भू महादेव दूसरे शब्दों में शम्भू शेक(महादेव की 88 पीढ़ियों का उल्लेख मिलता है - प्रथम..शंभू-मूला, द्वितीय-शंभू-गौरा और अंतिम शंभू-पार्वती) ही हैं"। रामेश्वरम उप ज्योतिर्लिंग, जाबालिपुरम्..के दिव्य "भील श्रृंगार दर्शन " अद्भुत और अद्वितीय है । वसुधैव कुटुम्बकम् के आलोक में धार्मिक सहिष्णुता का गुण धर्म सनातन धर्म के मूल में है, परंतु ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में इसकी अतिशयता अत्यधिक घातक सिद्ध हुई है। भारतवर्ष लंबे अर्से से सेवा की आड़ में मंतातरण, अत्याचार, अनाचार और विभिन्न प्रकार से शोषण का ईसाई मिशनरियों का केंद्र बिंदु बना हुआ है। मिशनरियों के दुष्कर्म और आतंक गोवा से प्रारंभ हुए। गोवा पर पुर्तगाली कब्जे के बाद पादरी जेवियर ने हिंदुओं का भयंकर उत्पीड़न किया। गोवा में ईसाई कानून 1561 में लागू हुए। हिंदू प्रतीक धारण करना भी अपराध था। तिलक लगाना और घर में तुलसी का पौधा रोपना भी मृत्युदंड का अपराध बना। ‘फ्रांसिस जेवियर: द मैन एंड हिज मिशन’ के अनुसार एक दिन में छह हजार लोगों के सिर काटने पर जेवियर ने प्रसन्नता व्यक्त की। एआर पिरोलकर ने ‘द गोवा इनक्वीजन’ में लिखा, ‘आरोपी के हाथ-पांव काटना, मोमबत्ती से शरीर जलाना, रीढ़ तोड़ना, गोमांस खिलाने जैसे अन्यान्य अमानवीय अत्याचार किए गए।’
प्रकारांतर से वंचितों और दलितों को पृथक परिभाषित कर हिन्दू धर्म में दरार पैदा की गई। ईसाई मिशनरियों द्वारा पृथक पृथक रास्तों से पृथक - पृथक तरीकों से हिंदुओं का तथाकथित धर्मांतरण कराया गया।कभी बलपूर्वक, छलपूर्वक तो कभी सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा नौकरी, चंगाई सभा और समानता की आड़ में मंतातरण कराया।लेकिन वर्तमान में वस्तुस्थिति यह है कि भारत में कैथोलिक चर्च के 6 कार्डिनल हैं, पर कोई दलित नहीं।30 आर्कबिशप में कोई दलित नहीं, 175 बिशप में केवल 9 दलित हैं, 822 मेजर सुपिरियर में 12 दलित हैं, 25000 कैथोलिक पादरियों में 1130 दलित ईसाई हैं। इतिहास में पहली बार भारत के कैथोलिक चर्च ने यह स्वीकार किया है कि जिस छुआछूत और जातिभेद के दंश से बचने को दलितों ने हिन्दू धर्म को त्यागा था, वे आज भी उसके शिकार हैं।दक्षिण अफ्रीका का एक विचारक कहता है “यूरोपियन देशों के पास चार तरह की सेना हैं थल सेना,जल सेना,वायु सेना और चर्च। वह सबसे पहले चर्च को भेजते हैं जो उनके लिए शिक्षा एवं सेवा के नाम पर जीत का वातावरण तैयार करती है और धीरे-धीरे वह समस्त प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं। चर्च और षड्यंत्रकारियों का मकड़जाल इतनी धूर्तता से अपना काम स्थानीय बौद्धिक वर्ग में करता है की वहाँ की संस्कृति कब नष्ट हो गयी पता ही नहीं चलता।" यह कितना भयावह है कि ईसाईयत का खेल खेलने के लिए विदेशों से हज़ारों करोड़ रुपया थोक के भाव भारत भेजा जाता है सिर्फ इतना ही नहीं , इनको धन की कमी न हो इसके लिए भारत में ही बैठे हिंदुत्व विरोधी और राष्ट्र के दुश्मन इनको अथाह धन उपलब्ध कराते हैं। धर्मान्तरण के लिए सबसे पहले निशाना बनाया जाता है गरीब दलित और आदिवासियों को जिनकी गरीबी और अशिक्षा को हथियार बना कर, धन का लालच देकर, बहला फुसलाकर कर हाथों में बाईबल और क्रॉस थमा दिया जाता है और उनको अपनी ही संस्कृति व धर्म का दुश्मन बना दिया जाता है, आप कह सकते हैं कि शनैः शनैः उनको मानसिक विकलांग बना दिया जाता है। इन सबके लिए ये ईसाई मिशनरी तरह तरह की पुस्तकों, प्रचार माध्यमों, फिल्मों कार्यक्रमों व चर्च में होने वाली नियमित बैठकों के साथ - साथ स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों का सहारा लेते हैं और नितांत योजनाबद्ध तरीके से लोगों के मस्तिष्क में उनके ही गौरव पूर्ण इतिहास, देवी देवताओं तीर्थों और महापुरुषों के प्रति विष भरने के लिये प्रशिक्षण सत्र चलाये जाते हैं और वो इस कार्य में सफल भी रहे हैं।
दिल्ली में तीन, उत्तर प्रदेश में 42, राजस्थान में 24, झारखंड में तीन, मध्य प्रदेश में चार, छत्तीसगढ़ में तीन, महाराष्ट्र में 11, पंजाब में छह, पश्चिम बंगाल में एक, हरियाणा में एक सहित अन्य एक मिलाकर कुल 99 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।उल्लेखनीय है कि ईओडब्लयू जबलपुर की टीम ने आठ सितंबर, 2022 को पूर्व बिशप पीसी सिंह के नेपियर टाउन स्थित कार्यालय व घर पर दबिश दी थी। दबिश के दौरान 80 लाख का सोना, एक करोड़ 65 लाख रुपये नकद, 48 बैंक खाते, 18352 यूएस डालर, 118 पांउड, नौ लग्जरी गाडिय़ां, 17 संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। दबिश के दौरान पूर्व बिशप देश के बाहर था। ईओडब्ल्यू ने उसे नागपुर एयरपोर्ट से 12 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। था। ईओडब्लयू ने पूछताछ के लिए पूर्व बिशप को चार दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान उसने 10 एफडी सहित 174 बैंक खातों की जानकारी दी थी। आरोप है कि पूर्व बिशप ने मिशन कंपाउंड स्थित बेशकीमती जमीन खुद के नाम आधे दामों में खरीदी थी। आरोप है कि पीसी सिंह ने बिशप रहते हुए जमीन बेची और क्रेता के तौर पर स्वंय खरीद ली। उसके विरुद्ध देशभर के अलग-अलग राज्यों में 80 मामले दर्ज है। आरोपित ने बिना अनुमति फर्जी तरीके से संस्था का रजिस्टे्रशन कराया था। विशप व उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक में साढ़े छह करोड़ रूपये पाये गये थे। संस्था के स्कूलों के नाम पर खुद के लिए वाहन खरीदे, बैंक खाते से छह करोड रूपये ट्रांसफर करने, नियम विरुद्ध तरीके से पत्नि व बेटे की नियुक्ति सहित अन्य लगे हैं।अब ईडी ने छापा मारा है,जैकब भी घेरे में आ गए हैं। दोनों के इंग्लैंड से फंडिंग संबंधों का खुलासा हुआ है। वहीं दूसरी ओर जबलपुर में ईसाई मिशनरीज की एक और करतूत सामने आई है। मेथोडिस्ट चर्च आफ इंडिया के नाम पर 6 एकड़ रिहायशी इलाके में निवासार्थ दी गई थी। फादर मनीष गिडियन सहित अन्य ने इस जमीन को खुर्द- बुर्द कर आवासीय भूमि के पट्टे की आड़ में होटल, हास्पिटल व दुकानों को विकसित कर, दुरुपयोग किया। यह कितना शर्मनाक और चार सौ बीसी है। अरबों रुपये की संपत्ति का दुरुपयोग है।