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प्रधानमंत्री समेत शीर्ष नेताओं ने लाला लाजपत राय को श्रद्धांजलि दी

Date : 28-Jan-2026

 नई दिल्ली, 28 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की जयंती पर उनके अद्वितीय बलिदान और राष्ट्रसेवा को नमन किया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लाला लाजपत राय की जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि स्वराज को जीवन का ध्येय मानकर लाला लाजपत राय ने युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना जगाई, जिसने औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी। उनका साहस, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा हमारे राष्ट्रीय चरित्र की आधारशिला है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि लाला लाजपत राय के बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन को एकता के सूत्र में बांधा और उसे महाज्वाला में परिवर्तित किया। वे भगत सिंह जैसे अनेक क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें विनम्र अभिवादन करते हुए उनके योगदान का स्मरण किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित के प्रति लाला लाजपत राय का अडिग संकल्प, निर्भीकता और त्याग आज भी भारतवासियों को राष्ट्रसेवा के मार्ग पर अग्रसर करता है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लाला लाजपत राय को अदम्य साहस, प्रखर राष्ट्रवाद और अडिग संकल्प का प्रतीक बताया और उन्हें नमन किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लाला लाजपत राय के ऐतिहासिक कथन “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी” को उद्धृत करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश उनके योगदान को कभी नहीं भुला सकता।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लाला लाजपत राय को भारत माता का अमर सपूत बताते हुए कहा कि स्वदेशी, शिक्षा, सामाजिक समरसता और वंचितों के सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी मार्गदर्शक है। लाला लाजपत राय का जीवन, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान देशवासियों को सत्य, न्याय और राष्ट्रसेवा के पथ पर सदैव प्रेरित करता रहेगा।

उल्लेखनीय है कि 'पंजाब केसरी' के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। साइमन कमीशन के खिलाफ 30 अक्टूबर 1928 को एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च का नेतृत्व करते समय ब्रिटिश पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के दौरान सिर में लगी गंभीर चोटों के कारण 17 नवंबर 1828 को उनकी मृत्यु हो गयी। वह लाल बाल पाल तिकड़ी के तीन सदस्यों में से एक थे, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवादी नेताओं की एक त्रिमूर्ति थी। इन नेताओं में लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल शामिल थे।


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