प्रयागराज, 28 जनवरी । शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। धार्मिक नगरी संगम से प्रस्थान करते समय आज शब्द साथ नहीं दे रहे, स्वर बोझिल है। प्रयाग की धरती पर यहां पर जो कुछ घटित हुआ, उसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है। संगम में हम बिना स्नान किये यहां से विदा ले रहे हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज बुधवार को पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हम प्रयागराज से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं। सबकुछ कहा जा चुका है। मंगलवार की शाम और प्रातः काल प्रशासन की ओर से हमारे मुख्य कार्याधिकारी काे एक प्रस्ताव भेजा गया। जिसमें कहा गया कि आप जब स्नान के लिए जाना चाहें, मेला प्रशासन ससम्मान स्नान कराने के लिए तैयार है। महाराज ने कहा कि हमें लगा अगर हम स्नान कर लेंगे, पुष्पवर्षा करवा लेंगे तो उस दिन की बात अधूरी रह जाएगी। जो असली मुद्दा है, जिसके लिए दस दिन तक हम फुटपाथ पर बैठे रहे। लंबा समय दिया लेकिन दस-ग्यारह दिन बीत जाने के बाद जब जाने का निर्णय लिया, तब ऐसा प्रस्ताव सामने आया। हमने स्वीकार नहीं किया। अगर कर लेता तो अपने भक्तों का अपमान होता, हम भारी मन से प्रयागराज से जा रहे हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि मुगलों के समय में जो नहीं हुआ, वह आज हो रहा है। एक तरफ गृहमंत्री का बयान आता है कि जो सरकार संतों का अपमान करेगी, वह सत्ता में स्थायी नहीं रह सकती। आज यहां अपमान हुआ, जिसे दुनिया ने देखा। इस दोहरे चरित्र को सनातनी माफ नहीं करेंगे। पत्रकार वार्ता के दाैरान शंकराचार्य ने दाे मिनट का मौन रख प्रार्थना की कि अपमान करने वालों को दंड मिले। उन्होंने कहा कि हमारी भौतिक हत्या का प्रयास किया गया। इन दिनों हमारी पीठ की हत्या का प्रयास हुआ, वो सफल रहा। ये हत्या यहां का प्रशासन नहीं, इसके पीछे यूपी शासन है। उन्होंने कहा कि हमने निश्चय किया है कि सनातनी को न्याय दिलाने के लिए सब कुछ करेंगे। संन्यासी के लिए मान—अपमान कुछ नहीं, लेकिन बात अब न्याय-अन्याय से ऊपर उठ गई है। हिन्दू की सरकार की पोल खुल गयी है। यह हिन्दू सरकार नहीं मुगल सरकार है, इसे अब हम भगाने का काम करेंगे।
