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तुर्किये भूकंप पीड़ितों को जमीअत ने एक हजार रमजान किट वितरित की

Date : 06-Apr-2023

 नई दिल्ली, 6 अप्रैल । तुर्किये में आये विनाशकारी भूकंप से प्रभावित एक हजार परिवारों के बीच जमीअत उलमा-ए-हिंद ने ’रमजान किट’ वितरित की है। इन किट्स में खाने-पीने और तेल साबुन से संबंधित सभी चीजें शामिल हैं। यह जानकारी जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने दी।

मौलाना हकीमुद्दीन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वहां जारी राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की और जरुरतमंद लोगों को अपने हाथों से मरअश में किट्स वितरित कीं। इस बीच जमीअत उलमा-ए-हिंद द्वारा उन एक हजार लोगों के लिए इफ्तार और पके हुए भोजन का भी प्रबंध किया गया जो टेंट में शरण लिए हुए हैं।

मरअश दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है। इसका पुनर्निर्माण सहाबी रसूल (पैगंबर के साथी) हजरत अमीर मुआविया ने कराया था और यह शहर सेल्जुक साम्राज्य और बाद में उस्मानिया साम्राज्य का हिस्सा रहा। यहां तुर्किये की सबसे बड़ी मस्जिद अब्दुल हमीद है लेकिन आज यह शहर विनाश का प्रतीक बन चुका है। मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने आगे कहा कि यहां तुर्किये में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर जमीअत उलमा-ए-हिंद, अल-खैर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में निरंतर राहत कार्यों को अंजाम दे रही है। हमारे प्रतिनिधिमंडल ने उन कार्यों की समीक्षा की। प्रतिनिधिमंडल में जमीअत उलमा-ए-हिंद ब्रिटेन के निदेशक मौलाना सईद, शहबाज भाई, अब्दुल्ला भाई और अय्यूब भाई भी शामिल हैं।

मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने बताया कि भूकंप से विनाश इतने बड़े पैमाने पर हुआ है कि दो महीने बीत जाने के बाद भी मलबा हटाने का काम पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि रमजान का महीना चल रहा है, लोग अपने तंबुओं में शरण लिए हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तुर्किये के लोगों में अल्लाह पर भरोसा और सांसारिक चीजों से अरुचि बहुत है, लेकिन वह हमारी मदद के बहुत हकदार हैं। इसलिए दुनिया भर के कल्याणकारी संगठनों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और जो संगठन यहां काम कर रहे हैं, उनके माध्यम से सहायता पहुंचानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह की तबाही हुई है, उससे निपटने के लिए अकेले सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। हालांकि तुर्की सरकार हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। कुछ जगहों पर टेंट की जगह कंटेनर हाउसों की व्यवस्था की गई है। जमीअत उलमा-ए-हिंद भी उनके लिए घर इत्यादि का निर्माण करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।


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