ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के दौरान अपने वैध परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका ओमान में परमाणु वार्ता के एक नए दौर की शुरुआत करने जा रहे हैं।
दोहा में आयोजित चौथे अरब-ईरानी सम्मेलन में बोलते हुए अराघची ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का प्रतिबद्ध सदस्य है और वह यूरेनियम संवर्धन सहित शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग के अधिकार को कायम रखेगा। उन्होंने दोहराया कि ईरान का उद्देश्य परमाणु हथियार बनाना नहीं है, और उनके सुरक्षा सिद्धांत में सामूहिक विनाश के हथियारों के लिए कोई जगह नहीं है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि यदि वार्ता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार प्राप्त न करे, तो यह उद्देश्य बिना किसी विवाद के हासिल किया जा सकता है। लेकिन, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लक्ष्य ईरान को उसके परमाणु अधिकारों से वंचित करना है या उस पर अवास्तविक मांगें थोपी जाती हैं, तो ईरान कभी झुकेगा नहीं।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने शुक्रवार को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि किसी भी समझौते के तहत ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन सुविधाएं खत्म करनी होंगी। ट्रंप प्रशासन ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया था, और चेतावनी दी है कि यदि नया समझौता नहीं होता तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब हथियार निर्माण के करीब पहुंच चुका है, जबकि तेहरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह से नागरिक उपयोग के लिए है।
