भारत की आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और संतुलित प्रतिक्रिया को वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन मिला है। ब्रिटेन, रूस, अमेरिका, इज़राइल, फ्रांस, यूएई, ईरान, कतर और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की है और उसकी निर्णायक प्रतिक्रिया की सराहना की है।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। इस हमले के जवाब में भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी और सुनियोजित कार्रवाई की। इसमें पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को निशाना बनाते हुए कई निर्णायक कदम उठाए गए—जैसे कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना और अटारी एकीकृत चेक पोस्ट को बंद करना।
इसके साथ ही, भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की—एक सीमित लेकिन अत्यंत सटीक सैन्य अभियान—जिसका उद्देश्य आतंकियों को दंडित करना और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को खत्म करना था। विस्तृत खुफिया जानकारी के आधार पर बहावलपुर और मुरीदके सहित नौ प्रमुख आतंकी शिविरों की पहचान की गई, जिन्हें समन्वित हवाई और जमीनी हमलों में निष्क्रिय कर दिया गया।
भारत की इस प्रतिक्रिया ने उसकी रणनीतिक परिपक्वता, परिचालन संयम और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को दर्शाया। जब पाकिस्तान इस सैन्य दबाव को झेलने में असमर्थ हो गया, तो उसने युद्धविराम की पहल की। 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ ने संपर्क कर भूमि, वायु और समुद्री सैन्य गतिविधियों को रोकने पर सहमति व्यक्त की। पाकिस्तान ने शांति बहाल करने के लिए अमेरिका से भी मदद की अपील की।
भारत की यह नीति—जो आक्रामकता के साथ संयम और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच संतुलन बनाए रखती है—विश्व समुदाय में उसके बढ़ते रणनीतिक कद और आतंकवाद के खिलाफ उसकी ज़ीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करती है।
