बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय खंड ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी की याचिका को स्वीकार करते हुए पार्टी के पंजीकरण को अवैध ठहराने वाले उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के चार सदस्यीय पीठ ने सुनाया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश डॉ. सैयद रेफात अहमद कर रहे थे।
अदालत ने अपने आदेश में चुनाव आयोग (ईसी) को निर्देश दिया कि वह जमात-ए-इस्लामी से जुड़े लंबित मुद्दों, विशेष रूप से पार्टी के पंजीकरण, का समाधान करे।
यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब जमात के वरिष्ठ नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम को हाल ही में रिहा किया गया है। उन्हें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड दिया गया था।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अब पार्टी के चुनावों में भाग लेने से जुड़ी सभी कानूनी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
गौरतलब है कि 1 अगस्त 2013 को उच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जमात का पंजीकरण अमान्य और शून्य घोषित कर दिया था। इसके बाद 7 दिसंबर 2018 को चुनाव आयोग ने एक गजट अधिसूचना के माध्यम से पार्टी का पंजीकरण रद्द कर दिया। जमात ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन नवंबर 2023 में अपीलीय खंड ने तकनीकी आधार पर इसे खारिज कर दिया था क्योंकि पार्टी के मुख्य वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए थे।
