बैंकॉक, थाईलैंड — बैंकॉक की एक अदालत ने आज थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री और विवादास्पद अरबपति थाकसिन शिनावात्रा के खिलाफ लेसे मैजेस्टे (राजद्रोह/राजशाही विरोधी) कानून के तहत चल रहे मामले को खारिज कर दिया। यह मामला एक दशक पुराने इंटरव्यू से जुड़ा था, जो उन्होंने एक दक्षिण कोरियाई समाचार पत्र को दिया था।
इस इंटरव्यू के आधार पर थाकसिन पर आरोप था कि उन्होंने थाई राजशाही के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। अगर उन्हें दोषी ठहराया जाता, तो उन्हें 15 साल तक की जेल की सजा हो सकती थी।
थाईलैंड का लेसे मैजेस्टे कानून राजशाही की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए बनाया गया है, लेकिन इसके दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से आलोचना होती रही है। मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कानून का अक्सर राजनीतिक विरोधियों और असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब थाकसिन की बेटी और वर्तमान में निलंबित प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा भी एक अदालती जांच का सामना कर रही हैं। इस मामले में उनके प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने की संभावना बनी हुई है।
थाकसिन शिनावात्रा, जो पहले भी तख्तापलट और भ्रष्टाचार के मामलों में निर्वासन झेल चुके हैं, अब एक बार फिर थाई राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। कोर्ट का यह फैसला उनकी राजनीतिक वापसी की राह को थोड़ा आसान बना सकता है, लेकिन देश की राजनीति में अस्थिरता की स्थिति अब भी बनी हुई है।
