काठमांडू, 07 अप्रैल । नेपाल में बिजली उत्पादन में तेजी से वृद्धि के बाद अब निर्यात पर ध्यान देना शुरू हो गया है। नेपाल 2022 से भारत को बिजली निर्यात कर रहा है और अब बांग्लादेश को भी निर्यात करने की कोशिश में लगा है।
प्रधानमंत्री प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार पहले ही बिजली व्यापार के लिए भारत के साथ बहुपक्षीय चर्चा करने की योजना बना चुकी है। सरकार के घटक दल सीपीएन (यूएस) के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल ने बांग्लादेश को बिजली बेचने के लिए भारत के साथ निकटता से बात करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
गुरुवार को नेपाल सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम में बिजली निर्यात के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद का जिक्र किया गया है। इससे साफ पता चलता है कि नेपाल भारत और बांग्लादेश से भी बातचीत की कोशिश कर रहा है।
नेपाल और बांग्लादेश के बीच जनवरी में हुई सचिव स्तर की संयुक्त संचालन समिति की बैठक में बिजली खरीदने और बेचने के लिए भारतीय विद्युत व्यापार निगम के साथ त्रिपक्षीय ऊर्जा व्यापार और बिजली लाइन पर चर्चा करने के लिए एक समझौता हुआ था। नेपाल अनौपचारिक रूप से भारत से अपनी पारेषण लाइन की क्षमता बढ़ाने और बांग्लादेश को बिजली बेचने की अनुमति देने का अनुरोध करता रहा है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक कुलमान घीसिंग भारत में ऊर्जा संबंधी बैठकों में ट्रांसमिशन लाइन के उपयोग की अनुमति देने का प्रस्ताव देते रहे हैं। ऊर्जा बैठकों में इस पर चर्चा की गई है। हालांकि, समझौता नहीं हो सका।
नेपाल में बांग्लादेश ने संयुक्त निवेश में 683 मेगावाट की सनकोशी 3 जलविद्युत परियोजना के निर्माण में रुचि दिखाई है। वह भारतीय कंपनी जीएमआर द्वारा लाइसेंस प्राप्त अपर कर्णाली की 900 मेगावाट में से 500 मेगावाट की खरीद करने के लिए भी विचार-विमर्श कर रहा है।
पिछले साल नेपाल ने भारत को 10 अरब नेपाली रुपये से अधिक की बिजली का निर्यात किया था। नेपाल गर्मियों में अधिक बिजली का निर्यात करता है।
जिस तरह जलविद्युत परियोजनाएं तेजी से बन रही हैं, नेपाल शुष्क मौसम में भी बिजली में आत्मनिर्भर हो रहा है। बारिश के मौसम में नेपाल में बिजली की बर्बादी की स्थिति आ जाती है। वर्तमान में भारत ही एकमात्र बाजार होने से समय-समय पर बिजली की बर्बादी होती है। इसलिए नेपाल का ध्यान बांग्लादेश की ओर चला गया है, जहां बिजली की भारी मांग है।
