पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक ए इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने याचिका में 9 मई को सेना के ठिकानों पर हुए हमलों के मामले में शामिल आम लोगों पर मुकदमा चलाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इमरान खान ने इस मामले में निष्पक्ष तरीके से सुनवाई की मांग की।
तहरीक ए इंसाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता उमर अयूब खान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और इस्लामाबाद प्रांतों में सेना की तैनाती को न्यायोचित ठहराने के लिए संविधान के अनुच्छेद-245 का उपयोग किया जा रहा है।
इस बीच पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें 9 मई के दंगे के आरोपियों के विरुद्ध आर्मी एक्ट और आतंकवाद विरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रस्तुत किया और इसे बहुमत से पारित करा लिया गया। प्रस्ताव पढ़ते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि नौ मई को बेरहम और ह्रदय विदारक घटनाएं हुई और इसे काला दिन करार देना चाहिए।
