नई दिल्ली, 23 सितंबर। भारत के शास्त्रीय संगीत और नृत्य कला की मूल परंपरा को बचाए रखने के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कला संबंधों के क्षेत्र में काम करने वाली भारत सरकार की संस्था को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने एक समिति का गठन किया है। भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना और पंडित बिरजू महाराज की प्रमुख शिष्या शाश्वती सेन को इसका निमंत्रक बनाया गया।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष विनय सहश्रबुद्धे ने हिन्दुस्थान समाचार के साथ खास बातचीत में बताया कि यह समिति इस बात पर नजर रखेगी कि फ्यूज़न नृत्य शैली के नाम पर कहीं उस शास्त्रीय नृत्य और संगीत शैली की मूल भावना के साथ छेड़-छाड़ तो नहीं की जा रही है । यह समिति भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत के क्षेत्र में काम करने वाले उन शिक्षकों के लिए बनी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक के तौर पर कर रही है।
उन्होंने बताया कि यह समिति शास्त्रीय नृत्य और संगीत के शिक्षकों को उनकी योग्यता के आधार पर एक सूची तैयार करेगी फिर उन्हें मान्यता प्रदान करेगी। इससे विदेशी छात्र सुनिश्चित कर पाएंगे कि उन्हें सही नृत्य सिखाया जा रहा है। इन मान्यता प्राप्त शास्त्रीय संगीत और नृत्य के शिक्षकों की सूची आईसीसीआर के वेबसाइट पर डाली जाएगी। भारतीय शास्त्रीय नृत्य-संगीत को सीखने की इच्छा रखने वाले विभिन्न देशों के छात्र अपने मनचाहे शिक्षक का चयन कर सकेंगे ।
उन्होंने बताया कि आईसीसीआर द्वारा गठित ये समिति उनके लिए पाठ्यक्रम भी तैयार करेगी । इस साल इस कमेटी ने भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक के लिए मान्यता प्राप्त शिक्षकों की सूची तैयार कर ली है । इस समिति में शाश्वती सेन के साथ लखनऊ के भरातखंडे यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर, डॉ मांडवी सिंह, अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी अहमदाबाद की अमी उपाध्याय के अलावा 3 और सदस्य शामिल हैं।
आईसीसीआर की इस नई पहल का मकसद भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत शैली को किसी भी तरह के मिलावट से बचना और नृत्य शैली के मूल भाव को बरकरार रखना है ।
