नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। डीएमके के राज्यसभा सांसद पी विल्सन ने उरुग्वे में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) शिखर सम्मेलन में भारतीय सांसदों के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। अन्य सदस्य पीटी उषा, भाजपा की राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी और सुप्रीम कोर्ट के वकील और राज्यसभा सांसद निरंजन रेड्डी थे।
सांसदों को संबोधित करते हुए पी विल्सन ने इसके दूसरे पक्ष को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर कानून बनाने में संसद की भूमिका के बारे में जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई समाज को ऐसे तरीकों से पुनर्परिभाषित कर रहा है जिसकी कभी शायद ही किसी को उम्मीद थी। हम एआई से समाज के लिए पैदा हुए बड़े खतरे को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसलिए, इंसानों को अपनी बुद्धि के साथ, कृत्रिम बुद्धि को हमेशा अपने नियंत्रण में रखना चाहिए।
विल्सन ने हथियार संधि और अन्य सम्मेलनों के जैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी एक अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, एआई विशेषज्ञ भी कृत्रिम बुद्धिमता को नियमित करने के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया जाना चाहिए जैसे परमाणु हथियारों के उपयोग को विनियमित करने के लिए संधियां की गई हैं। एआई के भी एक वैश्विक नियामक ढांचे को तैयार करना बेहद आवश्यक है क्योंकि प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ने की प्रतिस्पर्धा में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।
उरुग्वे की राजधानी मोंटेवीडियो, में 25-27 सितंबर को आयोजित शिखर सम्मेलन में भारत सहित 70 देशों के 200 सांसदों ने भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन का विषय- 'भविष्य को वर्तमान में देखना: भविष्य का लोकतंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संसद' से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। उरुग्वे की संसद के सहयोग से आईपीयू द्वारा आयोजित मोंटेवीडियो शिखर सम्मेलन ने अक्टूबर 2022 में हेलसिंकी में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन को आगे बढ़ाने की कोशिश की। पिछले साल के शिखर सम्मेलन ने वर्तमान निर्णय लेने में भविष्य को शामिल करने के महत्व को मान्यता दी विषय पर बात की थी।
अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) एक जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय मंच है जिसकी स्थापना 1889 में संसदीय कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। तब से यह मंच 179 सदस्यों और 14 सहयोगी सदस्यों के साथ एक वैश्विक संगठन बन गया है।
