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क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से लैस स्टील्थ फ्रिगेट 'तमाल' भारतीय नौसेना में शामिल

Date : 02-Jul-2025

पश्चिमी नौसेना बेड़े में होगी तैनाती, भारत-रूस रक्षा सहयोग का प्रतीक

भारतीय नौसेना ने रूस के कलिनिनग्राद में निर्मित अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट 'तमाल' को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। यह युद्धपोत शक्तिशाली क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से लैस है और समुद्र के साथ-साथ ज़मीन पर भी सटीक वार करने में सक्षम है। 'तमाल' का नाम पौराणिक कथाओं में इंद्र की तलवार पर आधारित है और यह भारत द्वारा विदेश से प्राप्त किया गया अंतिम युद्धपोत है, क्योंकि अब सभी नौसैनिक जहाज स्वदेश में निर्मित किए जाएंगे।

तमाल को भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े में तैनात किया जाएगा। यह न केवल भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारत-रूस रक्षा साझेदारी की मिसाल भी पेश करता है। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

तमाल ‘तुशील’ श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है, जो तलवार और टैग वर्ग के जहाजों का उन्नत रूप है। इस श्रेणी के युद्धपोत उन्नत हथियार प्रणालियों और स्टील्थ क्षमताओं से लैस हैं। तुशील परियोजना के तहत भारत दो और जहाज 'त्रिपुट' श्रेणी के रूप में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में बना रहा है। इनका निर्माण पूर्ण होने के बाद नौसेना एक समान क्षमताओं वाले कुल दस युद्धपोतों का संचालन करेगी, जो चार अलग-अलग श्रेणियों में होंगे।

भारतीय दल ने मास्को स्थित दूतावास के निर्देशन में रूस के यांतर शिपयार्ड, कलिनिनग्राद में तमाल के निर्माण की पूर्ण निगरानी की। नौसेना मुख्यालय के तहत पोत निर्माण निदेशालय ने इस परियोजना का संचालन किया। यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि इसमें 26% स्वदेशी उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल भी शामिल है।

तमाल के हथियारों में कई महत्वपूर्ण अपग्रेड किए गए हैं—जैसे लंबवत प्रक्षेपण प्रणाली से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत 100 मिमी तोप, 30 मिमी क्लोज-इन गन सिस्टम, अत्याधुनिक EO/IR प्रणाली, भारी टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट, और कई निगरानी एवं अग्नि नियंत्रण रडार। इसके अतिरिक्त, जहाज पर हवाई चेतावनी और बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जो इसके डेक से संचालित होंगे।

तमाल को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली से भी लैस किया गया है। इसका टनभार-से-अग्नि अनुपात इसे बेहद शक्तिशाली बनाता है, जिससे यह अपने आकार से कहीं अधिक घातक है।

इस युद्धपोत के चालक दल में 250 से अधिक प्रशिक्षित नौसैनिक हैं, जिन्होंने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग और कलिनिनग्राद में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। तीन महीनों के समुद्री परीक्षणों में तमाल ने सभी हथियारों, सेंसरों और प्रणालियों की दक्षता सिद्ध कर दी है।

तमाल का शुभंकर पौराणिक भालू राजा 'जाम्बवंत' और रूस के यूरेशियन भूरे भालू के संयोजन से प्रेरित है। इसके चालक दल ने स्वयं को 'द ग्रेट बियर्स' कहने का गौरवपूर्ण उपनाम दिया है, जो इस विध्वंसक युद्धपोत की शक्ति और साहस का प्रतीक है।


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