महतारी का अर्थ है माता या माँ, वंदन का अभिप्राय स्तुति से और योजना का अर्थ कार्य करने की रूपरेखा से है | अभी हाल ही में नवरात्री का पावन पर्व शुरू होने जा रहा है, जो माता या महतारी के 9 रूपों को समर्पित है | इसी प्रकार माताओं को समर्पित “महतारी वंदन योजना” को लागू छत्तीसगढ़ के साय सरकार द्वारा किया गया|
महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार, तथा परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की मंत्री परिषद ने इस योजना को लागू करनेका निर्णय लिया है। इस योजना से लगभग 4 लाख महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता दी गई और अंतिम सूची के आधार पर पात्र महिला के खाते में मार्च माह में प्रथम बार राशि का अंतरण किया गया | इससे छत्तीसगढ़ की लगभग 70 लाख पात्र महिलाओं को लाभ पहुंचा|
महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महतारी वंदन योजना के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2024- 25 के बजट में 3,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इससे महिलाओं की न सिर्फ रोजमर्रा की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी होंगी बल्कि उन्हें आर्थिक संबल भी मिलेगा।
महिलाओं ने प्रतिमाह एक हजार रूपए मिलने से अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने की तैयारी भी कर ली है। धमतरी में रुद्री निवासी लोमेश्वरी ओझा कहती हैं कि मेरी छोटी छोटी खुशियां इस राशि से पूरी होगी। मैं अपने बच्चों के लिए भी राशि खर्च कर सकूंगी। रायपुर की सविता साहू का कहना है कि तीज त्यौहार में उन्हें, मायके से जो भेंट मिलती है, उसको वह मनचाहा खर्च करती हैं। ऐसे में मुझे मुख्यमंत्री श्री साय भी भाई की तरह लग रहे हैं, जो हर महीने तीज की राशि हजार रुपए देंगे। यह राशि महिलाओें के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के साथ परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक साबित होगी।
महतारी वंदन योजना से मिली राशि से महिलाओं को परिवार के साथ खुद केस्वास्थ्य, पोषण और जीवन स्तर को उठाने का एक मजबूत आधार मिलेगा। महिलाओं की आर्थिक मजबूती से समाज में उनके प्रति भेदभाव में कमी औरजागरूकता आएगी। निश्चित रूप से आने वाले दिनों मेंमहतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की आधी आबादी की आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
साल में 12 हजार रुपये कोई छोटी रकम नहीं है..यह जरूरतमंद गरीब महिलाओं के लिए आर्थिक आधार भी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत चार महीनों से लगातार हर महीने के पहले सप्ताह में महिलाओं के बैंक खाते में इस योजना अंतर्गत एक हजार की राशि ऑनलाइन माध्यम से अंतरित करते हैं। मुख्यमंत्री के बटन दबाते ही महिलाओं के खाते में पहुँचने वाली यह राशि प्रदेश की लाखों महिलाओं की खुशियों का पर्याय बन जाती है। पहले कुछ रुपयों के लिए मोहताज महिलाओं को एक हजार की राशि मिलने पर उनकी अपनी छोटी-छोटी जरूरतों का सपना भी पूरा होता है। इस राशि का उपयोग वह सिर्फ अपने ही लिए नहीं करती...घर के राशन से लेकर अचानक से पति को कुछ रुपयों की पड़ी आवश्यकता, बच्चों के लिए कुछ जरूरी सामान, नाती-नतनी की खुशियों के ख़ातिर स्नेहपूर्वक उन्हें उनकी जरूरतों का उपहार देने में भी करती हैं। महिलाओं को हर महीने इस राशि का बेसब्री से इंतजार रहता है। ऐसी ही इस योजना की हितग्राही मीरा बाई हैं। पति शारिरिक रूप से असमर्थ है। किसी तरह मजदूरी कर घर के खर्चों को पूरा करती है। तीन बच्चे हैं और वे स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। स्कूल खुलते ही अपने बच्चों के लिए आई जरूरतों को पूरा करने के साथ घर की जरूरतों में भी महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग करती हैं। उन्होंने बताया कि घर के प्रति उनकी जिम्मेदारी है और हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनके लिए एक बहुत बड़ा योगदान है। इस राशि से ऐन वक्त पर बच्चों और पति को आई जरूरतों को भी पूरा कर पाती हैं। गाँव में रहने वाली सविता बाई के पति खेतों में काम करते हैं। बारिश में चाय की चुस्कियां लेती सविता बाई ने महतारी वंदन न्याय योजना का नाम आते ही चेहरे पर मुस्कान लाकर इस योजना से मिल रही खुशियों को प्रकट किया। उन्होंने कहा कि गाँव की महिलाओं के लिए एक हजार की राशि एक बड़ी राशि होती है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की आदत होती है कि दो-चार-पाँच रुपए बचा कर सौ-दो सौ जोड़ लें। यहां तो एक हजार रुपए मिल रहे हैं ऐसे में उनकी जरूरतों के लिए यह रकम कठिन समय में संजीवनी की तरह साबित हो रही है। बच्चों के लिए भी वह इस राशि को खर्च कर पाती है। उन्होंने बताया कि पैसा खाते में आने के बाद छोटी जरूरतों के लिए पति से अनावश्यक पैसा मांगना भी नहीं पड़ता।
वनांचल में रहने वाली श्रीमती बुधवारों बाई राठिया गाँव के हाट बाजार पहुँची थीं। अपने नाती आशीष को लेकर आईं बुधवारो बाई ने बाजार में नाती को न सिर्फ उनके पसंद का मिष्ठान खिलाया अपितु अन्य नाती-नतनिनों के लिए बाजार से मिष्ठान लिया और उनका नाती आशीष बारिश में नंगे पैर न घूमे इसे ध्यान रखते हुए महतारी वंदन योजना की राशि से स्नेहपूर्वक चप्पलें भी खरीदी। उन्होंने बताया कि उनका जो कुछ है उनके बेटे और नाती-नतनी ही हैं और बहुत ही खुशी मिलती है कि वृद्धावस्था में वह अपने नाती-नतनियों की कुछ जरूरतों को पूरा कर पाती हैं। यह सब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उनकी सरकार की बदौलत ही हो पाया है। उन्होंने हमारे संघर्षमय जीवन में खुशियों की मिठास घोल दी है।
रायपुर, 30 सितंबर 2024 | छत्तीसगढ़ राज्य ने रोजगार सृजन के मामले में देश भर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी Periodic Labour Force Survey (PLFS) की रिपोर्ट के अनुसारए छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। राज्य में चल रहे रोजगार सृजन और विकास प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ अब बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ चुका हैए जो बेरोजगारी दर के मामले में राज्य की बड़ी सफलता को दर्शाता है।
ग़ौरतलब है कि राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा पीएलएफएस के लिए नमूना सर्वेक्षण और डेटा संग्रह का कार्य किया जाता है। जो कि भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
रोजगार सृजन में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण प्रगति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व मेंए छत्तीसगढ़ सरकार ने बेरोजगारी को कम करने और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। सरकार ने हाल ही में पुलिसए स्वास्थ्यए पीएचई (सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी) और पंचायत विभागों में 1068 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन भर्तियों से राज्य में युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर मिलेंगेए जिससे राज्य की विभिन्न योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया है कि यह पहल राज्य के विकास को गति देने के साथ.साथ युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार ने स्वरोजगार और कौशल विकास को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैंए ताकि गांव के युवाओं को अपने ही इलाके में काम करने का अवसर मिल सके और उन्हें महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े।
PLFS रिपोर्ट में अन्य राज्यों की स्थिति
Periodic Labour Force Survey (PLFS) की रिपोर्ट ने देश भर के विभिन्न राज्यों में बेरोजगारी के आंकड़ों का भी खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसारए केरल में बेरोजगारी दर सबसे अधिक रहीए जहां 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 29.9% दर्ज की गई। केरल में महिलाओं में बेरोजगारी दर 47.1% और पुरुषों में 19.3% रही। इसके अलावाए लक्षद्वीप में बेरोजगारी दर सबसे अधिक 36.2% दर्ज की गईए जिसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूहमें यह दर 33.6% रही।
इसके विपरीतए छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में पांचवां स्थान प्राप्त किया हैए जो राज्य सरकार की रोजगार सृजन नीतियों की सफलता का प्रतीक है।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में माना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास करेंए जिससे वे नए उद्योगों में काम करने के लिए तैयार हो सकें। राज्य में कई कौशल विकास केंद्र खोले गए हैंए जहां युवाओं को आधुनिक तकनीकों और कौशलों की शिक्षा दी जा रही हैए ताकि वे रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकें।
छत्तीसगढ़ का विकास और प्रधानमंत्री मोदी का विज़न
छत्तीसगढ़ राज्यए जो कि पहले से ही अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध हैए अब रोजगार सृजन और विकास के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्आत्मनिर्भर भारतश् के विजन को भी साकार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के जरिए सरकार ने राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार देश के हर कोने में विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा हैए छत्तीसगढ़ सरकार उसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में प्रदेश के प्रत्येक गांव में रोजगार सृजन की योजनाओं का विस्तार करने का संकल्प लिया हैए ताकि राज्य का हर युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य का विकास तेज़ी से हो सके।
गोदावरी नदी के बाएं तट पर भद्राचलम में स्थित है। मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में स्थानीय तहसीलदार कंचरला गोपन्ना ने करवाया था, जिन्हें भक्त रामदास के नाम से जाना जाता था, जो भगवान श्री राम के एक उत्साही भक्त थे।
पहाड़ी का नाम मेरु के पुत्र भद्र के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने श्री राम के दर्शन करने के लिए तपस्या की थी। भगवान ने धम्मक्का नाम की एक महिला को सपने में दर्शन दिए और उसे मूर्तियों के बारे में बताया, जिन्हें एक मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया था। रामदास (गोपन्ना) ने वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया। त्रिबंगी मुद्रा में श्री राम और सीता की मूर्तियों की सुंदरता किसी का भी ध्यान खींचती है। श्री राम शंकु, चक्र, धनुष और भान धारण किए हुए हैं भगवान की छवि अद्वितीय है। उनकी चार भुजाएँ हैं जिनमें उन्होंने शंकु, चक्र, धनुष और बाण धारण किए हुए हैं। उनके बाईं ओर सीतादेवी और दाईं ओर लक्ष्मण हैं। भगवान की छवि एक दुर्लभ त्रिबंगी मुद्रा (तीन मोड़ के साथ) में है। दशावतार और हनुमान को समर्पित मंदिर हैं।
संत रामदास और कबीरदास इस मंदिर से जुड़े हैं। मंदिर बनाने के लिए राजस्व धन का उपयोग करने के कारण रामदास को एक मुस्लिम शासक ने जेल में डाल दिया था। बाद में राम और लक्ष्मण वेश बदलकर दरबार में उपस्थित हुए और सोने के सिक्कों में पूरी रकम चुकाई। राजा को रामदास की महानता का एहसास हुआ और उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया।
एक बार जन्म से मुसलमान कबीर मंदिर में पूजा करने आए। लेकिन पुजारियों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया। गर्भगृह में स्थित मूर्तियाँ भी तुरंत गायब हो गईं।
ऐसा माना जाता है कि दंडकारण्य में रहने के दौरान श्री राम, सीता और लक्ष्मण ने इस पवित्र स्थान पर पदयात्रा की थी। लगभग 35 किमी दूर स्थित पर्णशाला महाकाव्य घटनाओं का प्रमाण है। सीता देवी और स्वर्ण मृग के पैरों के निशान आज भी यहाँ दिखाई देते हैं। पर्णशाला के मंदिर में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्ति हैं जिन्हें "सोका रामुडु" कहा जाता है। मंदिर के ठीक सामने और गोदावरी नदी के दूसरी ओर एक विशाल पर्वत श्रृंखला है, जिस पर रावण के रथ के पहियों के सागौन मिले हैं।
