भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। पायलट लाइन से बने पहले मेड-इन-इंडिया चिप्स का सेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया, जिससे यह दर्शाया गया कि भारत अब डिज़ाइन से निर्माण तक की संपूर्ण सेमीकंडक्टर क्षमता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
यह महत्वपूर्ण क्षण नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2025 के पहले दिन सामने आया, जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ये चिप्स प्रधानमंत्री को सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन विश्वास, बौद्धिक संपदा के सम्मान, आपूर्ति श्रृंखला विकास और वैश्विक सहयोग जैसे मूल स्तंभों पर आधारित है।
श्री वैष्णव ने ज़ोर देकर कहा कि भारत दुनिया के सामने एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है और उसका दृष्टिकोण पारस्परिक विकास तथा लाभकारी सहयोग पर केंद्रित है।
12 रणनीतिक समझौते और एक अरब डॉलर की नई पहल
सेमीकॉन इंडिया 2025 के दौरान 12 समझौता ज्ञापनों (MoUs) की घोषणा की गई, जो उत्पाद विकास, सेवा क्षमताओं के विस्तार और कौशल विकास पर केंद्रित हैं। इनका उद्देश्य देश में एक आत्मनिर्भर, नवाचार-आधारित सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करना है।
इसके साथ ही, मंत्री ने लगभग 1 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता के साथ ‘डीप टेक अलायंस’ (Deep Tech Alliance) के गठन की घोषणा की। शुरुआत में इसका फोकस सेमीकंडक्टर उद्योग पर रहेगा, लेकिन भविष्य में यह गठबंधन स्वच्छ ऊर्जा, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी विस्तार करेगा। यह पहल उभरते डीप टेक स्टार्टअप्स को आवश्यक उद्यम पूंजी और सहयोग प्रदान करेगी।
तीन साल में सपना से उत्पादन तक
दिसंबर 2021 में शुरू हुआ भारत सेमीकंडक्टर मिशन, केवल साढ़े तीन वर्षों में अनुमोदन से लेकर उत्पादन तक पहुँच गया है — जो वैश्विक मानकों के हिसाब से एक तेज़ और प्रेरणादायक प्रगति मानी जा रही है।
यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाती है।