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हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट, 5 नेशनल हाईवे और 1334 सड़कें बंद, भाखड़ा डैम के चारों फ्लड गेट खोले गए

Date : 02-Sep-2025

शिमला, 02 सितंबर । हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का असर मंगलवार को भी जारी रहा। शिमला में दिनभर झमाझम बारिश होती रही, वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में भी लगातार वर्षा से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे यानी 3 सितंबर के लिए छह जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और किन्नौर में ओरेंज अलर्ट जबकि ऊना और बिलासपुर में येलो अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार 4 सितंबर से मॉनसून धीरे-धीरे कमजोर होगा और 4 से 8 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन इस दौरान कोई विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

बीते 24 घंटे में बिलासपुर जिले के नैना देवी में सर्वाधिक 200 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला जिले के रोहड़ू में 80, हमीरपुर के बड़सर में 60, कुकुमसेरी, नादौन, धर्मशाला, ऊना, करसोग, आरएल बीबीएमबी, भुंतर, सराहन, मनाली, नाहन और चुआडी में 50-50 मिमी, नंगल डैम व ऊना में 49-49, भुंतर व सराहन में 47-47, बंजार में 42 और बिलासपुर में 40 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मंडी और कुल्लू जिलों में नेशनल हाईवे बंद रहने से कई वाहनों की दिन में लंबी कतारें लगी रहीं। किन्नौर जिले में घूमने आए केरल के पर्यटकों को प्रशासन ने सुरक्षित रूप से अवरुद्ध निगुलसरी मार्ग से शिमला के लिए रवाना किया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मंगलवार शाम तक कुल पांच नेशनल हाईवे और 1334 सड़कें अवरुद्ध हैं। मंडी में 281, शिमला में 255, चंबा में 239, सिरमौर में 139 और सोलन में 46 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में एनएच-3 और एनएच-305, किन्नौर में एनएच-5, मंडी में एनएच-3 और सिरमौर में एनएच-707 यातायात के लिए ठप पड़े हैं। लगातार भूस्खलन के कारण रेलवे ने कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक पर 5 सितंबर तक ट्रेनों की आवाजाही रद्द कर दी है।

भारी बारिश से बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित रही। पूरे प्रदेश में 2180 ट्रांसफार्मर बंद हो गए हैं। सिरमौर में 443, मंडी में 373, कुल्लू में 323, शिमला में 302, चंबा में 207, सोलन में 191, हमीरपुर में 129 और लाहौल-स्पीति में 117 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली गुल रही। प्रदेश की कुल 777 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें शिमला की 272, कांगड़ा की 212 और चंबा की 100 योजनाएं शामिल हैं।

भारी वर्षा और ऊपरी जलभराव के कारण बीबीएमबी ने भाखड़ा डैम के चारों फ्लड गेट 7-7 फीट तक खोल दिए हैं। सुबह गोविंद सागर झील का जलस्तर खतरे के निशान 1680 फीट से तीन फीट नीचे था। जलस्तर बढ़ने से बांध से पानी छोड़ने की तैयारी की गई है ताकि डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की स्थिति से बचा जा सके।

सिरमौर जिले में पांवटा साहिब के पांवटा क्षेत्र में गिरी नदी उफान पर है और बांगरण गांव के कई घर खतरे में हैं। लोग देर रात से ही सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हनुमान मंदिर परिसर तक पानी घुस चुका है।

इस बीच राज्य के उच्च पर्वतीय इलाकों में भी बर्फबारी शुरू हो गई है। मनाली की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी दर्ज की गई, वहीं लाहौल-स्पीति की स्पीति घाटी के कुंजम जोत में भी बर्फबारी हुई। इससे तापमान गिर गया और मौसम ठंडा हो गया है। खराब मौसम के चलते किन्नौर के निचार उपमंडल सहित प्रदेश के 11 जिलों में सभी शिक्षण संस्थान बंद रहे।

मॉनसून सीजन में अब तक हिमाचल में 340 लोगों की मौत हो चुकी है, 41 लोग लापता और 389 घायल हुए हैं। पूरे राज्य में 4497 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 917 पूरी तरह ढह गए। इसके अलावा 486 दुकानें और 4008 गौशालाएं नष्ट हो चुकी हैं। सार्वजनिक संपत्ति को अब तक 3525 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। प्रदेश सरकार ने लगातार हो रही तबाही को देखते हुए हिमाचल को आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर दिया है।


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