जयपुर, 09 मई। कोटा में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने की गंभीर घटना के बाद सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा प्रोटोकॉल की सख्त पालना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया है कि इमरजेंसी, ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और अन्य संवेदनशील इकाइयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शनिवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में उपचार संबंधी निर्धारित प्रोटोकॉल, स्टरलाइजेशन व्यवस्था, दवा भंडारण और मरीजों की निगरानी प्रणाली की नियमित समीक्षा की जाए।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित संस्थान प्रभारी और यूनिट हेड सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।
सरकार ने निर्देशित किया है कि ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और इमरजेंसी इकाइयों में नियमित स्टरलाइजेशन सुनिश्चित किया जाए ताकि संक्रमण का खतरा न्यूनतम रहे। साथ ही चिकित्सा उपकरणों और मशीनों की भी प्रोटोकॉल के अनुरूप सफाई और निगरानी अनिवार्य होगी।
राज्य स्तर से विशेष मॉनिटरिंग टीमें गठित कर समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। जहां भी कमी या लापरवाही पाई जाएगी, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। तात्कालिक सुधारात्मक कार्यों के लिए आरएमआरएस फंड के उपयोग की अनुमति भी दी गई है।
प्रमुख शासन सचिव ने अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति पर भी विशेष जोर दिया।
उन्होंने निर्देश दिए कि ड्यूटी रजिस्टर का समुचित संधारण किया जाए और ड्यूटी समय में सभी वरिष्ठ चिकित्सक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। अनुपस्थित या लापरवाह पाए जाने वाले कार्मिकों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी।
