प्रेरक प्रसंग अध्याय 9:आनंद का मूल्य | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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प्रेरक प्रसंग अध्याय 9:आनंद का मूल्य

Date : 07-Dec-2023

 

स्वामी  रामतीर्थ जब सैनफ्रान्सिस्को में थे, तबएनीनामक एक महिला उनके पास आयी और हृदयविदारक क्रन्दन करती हुई बोली, प्रभो, मैं बहुत दुःखी हूँ | मेरा बच्चा जानलेवा बुखार से चल बसा है, कृपया उसे वापस दिला दें|’

स्वामीजी बोले, ‘माता, मैं तुम्हारा बच्चा वापस ला दूँगा | साथ ही तुम्हारा दुःख दूर करने के लिए आनंद का मंत्र भी दूँगा, किन्तु तुम्हें उसके लिए कीमत चुकानी होगी |’

आवेश में वह दुःखिनी बोली, “ स्वामीजी, मेरे बच्चे के लिए चाहे जितनी भी कीमत चुकानी पड़े, मैं पीछे हटूंगी | मेरे पास धन-दौलत की कमी नहीं, आप जो माँगे, मैं दूँगी |’’

स्वामीजी बोले, ‘राम के परमानन्द साम्राज्य में इस दौलत की कुछ कीमत नहीं | राम इससे भी बड़ी कीमत माँगता है |’

स्वामीजी, मैं हर कीमत पर वह आनंद प्राप्त करना चाहती हूँ |’- बह स्त्री बोली |

तो फिर राम के साम्राज्य में आनंद का अभाव ही कहाँ ?’’- कहते हुए स्वामीजी उसे एक अत्यन्त निर्धन  बस्ती में ले गये और एक अनाथ हब्शी बालक का हाथ पकड़कर कहा, “यह रहा तुम्हारा बच्चा! माता, इसे गोद ले लो | यह स्वयं राम का आत्म-स्वरुप है | इसे पुत्रवत पालना | तू इसको जितना लाड करेगी, तेरे सुख का दरिया उतना ही उमड़-उमड़कर बहेगा |’’

स्वामीजी के इन शब्दों में विश्व के समस्त उपेक्षितों, मातृहीनों एवं भूखों को अपने आलिंगन में समेट लेने वाला स्नेह बरस रहा था | उनके मुख पर ईश्वरीय आभा खेल रही थी | पराये दुःख-दर्द को अपनाकर उसमें अपना खोया आनंद-धन पा लेने का गुरुमंत्र एनी के हाथ में  लग गया | उसके गोरेपन का गर्व गल गया | उच्चता के अभिमान की दीवार ढह गयी | उस धूलि-धूसरित हब्शी बालक को उसने अपनी कोख से जन्मे बच्चे की तरह छाती से चिपका लिया | उसका श्मशान-सदृश घर फिर निश्छल हास्य की किल-कारियों से गूंज उठा |

 


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