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जबलपुर में जन्मे महंत केशवजीवन के भगीरथ प्रयास से आबू धाबी में बना प्रथम हिन्दू मंदिर

Date : 15-Feb-2024

अयोध्या में 22 जनवरी को भगवान् श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत नये युग का सूत्रपात हुआ है जिसके आलोक में  जबलपुर में जन्मे स्वामी केशवजीवन दास के भगीरथ प्रयास से मिडिल ईस्ट का प्रथम हिन्दू मंदिर आबू धाबी में बना और 14 फरवरी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। आबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर का सपना 

बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के छठवें आध्यात्मिक गुरु महंत स्वामी महाराज ने देखा था जिनका जन्म 13 सितंबर 1933 को मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम मणिभाई नारायणभाई पटेल और माता का नाम दहिबेन है। उनके जन्म के कुछ समय बाद ही मणिभाई के घर स्वामी नारायण संस्था के शास्त्रीजी महाराज जबलपुर आए थे। उन्होंने ही मणिभाई के नवजात बेटे को नाम दिया था केशव। 
घर के आध्यात्मिक माहौल का पड़ा असरमूलतः गुजरात में आणंद के रहने वाले मणिभाई व्यापार के लिए जबलपुर आए और वहीं बस गए थे। उनके घर का वातावरण बहुत आध्यात्मिक था, जिसका प्रभाव बालक केशव पर भी पड़ा। माता-पिता संतों का आदर करते और सत्संग में भाग लेते थे, इससे केशव अत्यधिक प्रभावित रहते थे। 
 
वर्ष 1957 में योगीजी महाराज ने केशव को सदस्य दीक्षा दी, जिसके बाद उन्होंने अक्षरधाम मंदिर के निर्माण के दौरान सेवाएं दीं. उनका पूरा नाम है स्वामी केशवजीवनदासजी, लेकिन प्रेम से दुनिया भर के भक्त उन्हें महंत स्वामी महाराज कहते हैं. उन्होंने प्रवचन करने शुरू किए तो बड़ी संख्या में भक्त उनसे प्रभावित होते गए। .स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज ने 20 जुलाई 2012 को महंत स्वामी महाराज को अपना उत्तराधिकारी यानी छठवां आध्यात्मिक गुरु घोषित किया था. इसके बाद महंत स्वामी महाराज के नेतृत्व में बीएपीएस संस्था ने देश ही नहीं, दुनिया के कई देशों में कई स्वामीनारायण मंदिर बनवाए। 
सन् 1997 में जब महंत स्वामी महाराज संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए थे, तभी उन्होंने अबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर की स्थापना का विचार व्यक्त किया था, जिसके सहारे अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और धर्मों के बीच एकता को बढ़ावा दिया जा सके. इसके सालों बाद संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने मंदिर के लिए जमीन आवंटन की घोषणा 2015 में की थी |
भारत और यूएई के बीच दोस्ताना संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए खुद अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई के सशस्त्र बलों के उप सर्वोच्च कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस मंदिर के लिए 13.5 एकड़ जमीन दान की थी। मंदिर का 20 अप्रैल 2019 को इसका शिलान्यास हुआ, जिसमें महंत स्वामी महाराज के साथ ही भारत और यूएई के तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे. वहां अब 27 एकड़ में फैला मिडिल ईस्ट का पहला हिंदू मंदिर बन गया है। 
सात अमीरात के प्रतीक हैं मंदिर के सातों शिखर32.92 मीटर यानी करीब 108 फुट ऊंचे, 79.86 मीटर यानी 262 फुट लंबे और 54.86 मीटर यानी 180 फुट चौड़े इस मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू ग्रंथों में बताए गए शिल्प शास्त्र के आधार पर किया गया है. बताया जा रहा है कि एक साथ 10 हजार लोगों की क्षमता वाला यह मंदिर पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा. इस मंदिर के अंदर सात मंदिर और सात शिखर हैं जो सात अमीरात के प्रतीक बताए जा रहे हैं। 
बीएपीएस की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार दुनिया भर में संस्था के 1100 से ज्यादा मंदिर और 3850 से ज्यादा सेंटर हैं. संस्था का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय अहमदाबाद में है. अमेरिका के तो कई शहरों में संस्था की ओर से मंदिर बनवाए गए हैं और इसके सेंटर भी हैं. इसके अलावा यूके समेत यूरोप के देशों पुर्तगाल, बेल्जियम, अफ्रीकी देशों केन्या, तंजानिया, युगांडा, साउथ अफ्रीका, बोत्स्वाना, एशिया पैसिफिक में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, चीन के हॉन्गकॉन्ग और जापान में भी स्वामीनारायण मंदिर हैं. मिडिल ईस्ट में दुबई, कुवैत, मनामा, शारजाह और मस्कट आदि स्थानों पर बीएपीएस के सेंटर हैं और पहला मंदिर अबू धाबी में बनाया गया है।यह मिडिल ईस्ट का पहला हिंदू मंदिर है जिसमें भगवान् के रुप में स्वामी नारायण, राधा कृष्ण, राम-सीता, शिव - पार्वती, जगन्नाथ, वेंकटेश्वर और अयप्पा को प्रतिष्ठित किया गया है।

लेखक - डॉ. आनंद सिंह राणा
 
 

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