वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता और पूर्व सांसद सुरवरम सुधाकर रेड्डी का कल देर शाम हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के एक प्रमुख चेहरा रहे सुधाकर रेड्डी ने 2012 से 2019 तक पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य किया। उन्होंने श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक न्याय, और वंचित वर्गों के हितों की पुरजोर वकालत की। उनके विचार और संघर्ष उन्हें वामपंथी राजनीति का एक मजबूत स्तंभ बनाते हैं।
राजनीतिक सफर:
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सुधाकर रेड्डी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कुरनूल में एक छात्र नेता के रूप में की थी।
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उन्होंने आगे चलकर सीपीआई में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभाई और लगातार सात वर्षों तक पार्टी के शीर्ष पद पर रहे।
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वे दो बार, 1998 और 2004 में, नलगोंडा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
उनका जन्म तेलंगाना के महबूबनगर जिले में हुआ था। उन्होंने न सिर्फ राज्य में बल्कि पूरे देश में वामपंथी राजनीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुरवरम सुधाकर रेड्डी को एक सिद्धांतवादी नेता, समर्पित सांसद, और हाशिए के लोगों के अधिकारों के संघर्ष में अग्रणी योद्धा के रूप में याद किया जाएगा। उनके निधन से भारतीय वामपंथी आंदोलन ने एक सच्चा मार्गदर्शक और निडर आवाज खो दी है।
