कन्नौज से हैं हिमंता बिस्वा सरमा के पूर्वज, दूसरी बार बन रहे असम के मुख्यमंत्री | The Voice TV

Quote :

“स्वयं जैसे हो वैसे ही रहो; बाकी सब तो पहले से ही कोई और बन चुके हैं।” ― ऑस्कर वाइल्ड

National

कन्नौज से हैं हिमंता बिस्वा सरमा के पूर्वज, दूसरी बार बन रहे असम के मुख्यमंत्री

Date : 11-May-2026

 कन्नौज, 10 मई । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। लेकिन उनकी जड़ें असम की बजाय उत्तर प्रदेश के कन्नौज (कान्यकुब्ज) से जुड़ी हैं। वे खुद को कान्यकुब्ज ब्राह्मण मानते हैं और इसकाे स्वीकार भी कर चुके हैं।

1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में जन्मे हिमंता एक शिक्षित असमिया ब्राह्मण परिवार से आते हैं। उनके पिता कैलाश नाथ सरमा प्रसिद्ध लेखक, कवि और गीतकार थे, जबकि मां मृणालिनी देवी लेखिका थीं और असम साहित्य सभा की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। परिवार बाद में गुवाहाटी के उलुबाड़ी इलाके में बस गया।

'बाहरी' राजनीति में दिलचस्प विरोधाभास

'बाहरी बनाम असमिया' पहचान की राजनीति में सक्रिय हिमंता ने फरवरी 2024 में असम विधानसभा में खुलासा किया, हम कन्नौज से लगभग 500 साल पहले असम आए थे। यह बयान भूमि पट्टा और पहचान संबंधी बहस के दौरान आया था।

कान्यकुब्ज ब्राह्मण प्राचीन कन्नौज से देश के विभिन्न हिस्सों में फैले। कन्नौज हर्षवर्धन काल (7वीं शताब्दी) में शिक्षा, संस्कृति और राजनीति का प्रमुख केंद्र था। इतिहासकारों के अनुसार, मध्यकाल में (विशेषकर 16वीं शताब्दी में कोच राजवंश के समय) कन्नौज, मिथिला और बंगाल से ब्राह्मणों को असम में आमंत्रित किया गया। वे ब्राह्मणिकल रीति-रिवाज, वेदों, ज्योतिष और हिंदू संस्कृति का प्रसार करने के लिए बुलाए गए थे।

असमिया ब्राह्मणों में सरमा उपनाम इसी परंपरा का हिस्सा है। विकिपीडिया और ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, असम में ब्राह्मणों का प्रवास मिथिला, कन्नौज, बंगाल और अन्य जगहों से हुआ। कोच राजा नरनारायण (1554-1587) और अहोम राजाओं (खासकर रुद्र सिंह और शिव सिंह) के समय में ब्राह्मणों को से आमंत्रित किया गया।

डॉ. जीवन शुक्ला जैसे विद्वान इस बात की पुष्टि करते हैं कि कान्यकुब्ज ब्राह्मण (सरमा, चटर्जी, मुखर्जी, बनर्जी आदि उपनाम) की जड़ें कन्नौज से जुड़ी हैं। कुछ कायस्थ समुदाय (घोष, दास) भी इसी से संबंध रखते हैं।

हाल ही में असम से एक कैबिनेट मंत्री, विधायक, पुलिस अधिकारी सहित कन्नौज आये थे। कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन लोगों को सम्मानित किया गया जिनके पूर्वज कन्नौज से जुड़े हैं। हिमंत बिस्वा सरमा का नाम भी इसमें शामिल था, हालांकि वे स्वयं उपस्थित नहीं हो सके।

ऐसे हुई थी हिमंता की राजनीति की शुरूआत

हिमंता की राजनीतिक शुरुआत अखिल असम छात्र संघ (आसू) से हुई थी। 20 साल की उम्र तक वे भाषण कला के लिए मशहूर हो चुके थे। छात्र आंदोलनों के दौरान उन्होंने प्रफुल्ल कुमार महंत और भृगु फूकन जैसे नेताओं से प्रेरणा ली। असम गण परिषद सरकार के पतन के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और बाद में राहुल गांधी से निजी नाराज़गी के चलते उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी। कांग्रेस से बीजेपी में आने के बाद वे असम की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरे बन गए। 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2026 के चुनावों में एनडीए की भारी जीत के बाद अब दूसरी बार पद संभालने जा रहे हैं।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement