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आईआईटी खड़गपुर में सरोद की स्वर-लहरियां, उस्ताद अमजद अली खान ने मोहा मन

Date : 15-Jan-2026

 खड़गपुर, 15 जनवरी । भारतीय सांस्कृतिक विरासत और शैक्षणिक उत्कृष्टता का अनुपम संगम बुधवार शाम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर में देखने को मिला। पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली खान ने 11वें स्पिक मैके अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 के कर्टन रेजर कार्यक्रम के तहत अपने सरोद वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन आईआईटी खड़गपुर के 75वें प्लेटिनम जयंती समारोह का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ आईआईटी खड़गपुर के कार्यवाहक निदेशक प्रो. रिंटू बनर्जी, रजिस्ट्रार कैप्टन अमित जैन सहित अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थित में हुआ। नेताजी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी एवं अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। स्पिक मैके आईआईटी खड़गपुर चैप्टर द्वारा आयोजित इस संगीतमय संध्या ने समग्र शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

इस अवसर पर स्पिक मैके आईआईटी खड़गपुर चैप्टर के प्रमुख प्रो. सी. एस. कुमार ने कहा कि यह केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव था, जिसने संस्थान की आत्मा को स्पंदित कर दिया।

उस्ताद अमजद अली ख़ान के साथ तबले पर पं. मिथिलेश झा और युवा तबला वादक रोहन बोस ने संगत की। कार्यक्रम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एस.एन. बोस ऑडिटोरियम दर्शकों से भर गया, जबकि रमन ऑडिटोरियम में लाइव प्रसारण के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रोताओं ने प्रस्तुति का आनंद लिया।

यह कार्यक्रम 25 से 31 मई के बीच आयोजित होने वाले 11वें स्पिक मैके अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की श्रृंखला की शुरुआत है। अगला कर्टन रेजर कार्यक्रम 23 जनवरी को प्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट की प्रस्तुति के साथ आयोजित होगा।

स्पिक मैके पिछले चार दशकों से युवाओं को भारत की शास्त्रीय, लोक एवं पारंपरिक कला विधाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। वर्ष 1951 में स्थापित आईआईटी खड़गपुर अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जो उसकी समृद्ध विरासत और राष्ट्र निर्माण में योगदान का प्रतीक है।


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