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बीएचयू के प्रो. सिद्धार्थ सिंह उत्तर प्रदेश सरकार के बौद्ध संस्कृति संवर्धन सम्मान से होंगे सम्मानित

Date : 21-Jan-2026

 वाराणसी,21 जनवरी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. सिद्धार्थ सिंह का चयन उत्तर प्रदेश सरकार के "बौद्ध संस्कृति संवर्धन सम्मान" के लिए किया गया है। उन्हें यह सम्मान गणतंत्र दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों प्रदान किया जाएगा। इक्यावन हजार रुपये की राशि वाला यह सम्मान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बौद्ध संस्कृति और अध्ययन के प्रति दीर्घकालीन योगदान करने वाले किसी विद्वान को दिया जाता है। बुधवार को यह जानकारी बीएचयू के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। बताया गया कि प्रो. सिद्धार्थ सिंह वर्तमान में नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय, संस्कृति मंत्रालय के कुलपति हैं।

प्रो. सिद्धार्थ सिंह 2018 से 2022 तक टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक एवं राजनयिक भी रहे, जहाँ उन्होंने जापान में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक कार्य किया। उन्हें पूर्व में भी जापान फाउंडेशन फेलोशिप, जापान (2003-04), फुलब्राइट सीनियर रिसर्च फेलोशिप, अमेरिका (2011-2012) तथा वादरायण व्यास राष्ट्रपति पुरस्कार, भारत (2005) जैसे अनेक सम्मानों को प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। प्रो. सिद्धार्थ उप्पसाला विश्वविद्यालय (स्वीडन) में भारतीय अध्ययन के आईसीसीआर चेयर प्रोफेसर ऑफ इंडियन स्टडीज़ (2014-2015), एवं कार्लस्टाड विश्वविद्यालय (धर्म-इतिहास संकाय, 2006 एवं 2008) तथा हैदराबाद विश्वविद्यालय में बौद्ध दर्शन के विज़िटिंग प्रोफेसर रहे हैं।

उन्होंने चार पुस्तकों का प्रकाशन किया है - सद्धम्मसंगहो (13वीं शताद्वी तक बौद्ध धर्म का इतिहास) (प्रकाशकः मोतीलाल बनारसीदास), जिनचरित (बुद्ध की जीवनी) (प्रकाशकः पिलग्रिम्स पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली), ज़ेन बौद्ध धर्म-संगीत (प्रकाशकः साहित्य भंडार, इलाहाबाद) तथा रिमेम्बरिंग द लीजेंड: कोसेत्सु नोसू (प्रकाशकः महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया) । उन्होंने हिंदी, अंग्रेज़ी और जापानी भाषाओं में भारतीय संस्कृति और बौद्ध धर्म के विविध पहलुओं पर 80 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं तथा भारत सहित अमेरिका, जापान, चीन, स्वीडन, एस्टोनिया, थाईलैंड, सिंगापुर, ताइवान, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम और नेपाल आदि देशों में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान दिए और शोध-पत्र प्रस्तुत किए हैं।


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