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उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर बहस तेज, भाजपा विधायक की मांग पर धामी सरकार करेगी मंथन

Date : 02-Apr-2026

 देहरादून, 02 अप्रैल । उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। ग्रीष्मकालीन राजधानी भराणीसैंण में बजट सत्र के दौरान रुद्रपुर से भाजपा विधायक शिव अरोरा की ओर से राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किए जाने की मांग उठाए जाने के बाद यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। सत्र के दौरान उठे इस प्रस्ताव को भाजपा के कुछ अन्य विधायकों का समर्थन मिला है, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय पर तत्काल निर्णय के बजाय व्यापक वैचारिक मंथन की आवश्यकता जताई है।

विधायक शिव अरोरा ने सदन में राज्य की बदलती जनसंख्या संरचना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय असंतुलन भविष्य में गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने तीन से अधिक बच्चों वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं से वंचित करने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार, इससे राज्य के संसाधनों और बजट पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित किया जा सकता है। इस मुद्दे पर भाजपा के अन्य विधायकों ने भी समर्थन जताया, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताया।

विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस विधायक काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने कहा कि भाजपा इस तरह के मुद्दों के जरिए एक वर्ग विशेष को निशाना बनाती है। उन्होंने टिप्पणी की कि इस प्रकार के बयान संकीर्ण मानसिकता को दर्शाते हैं। इस प्रकार के प्रस्ताव एक विशेष वर्ग को लक्षित करते हैं और इसे संकीर्ण सोच करार दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून एक व्यापक नीति विषय है, जिस पर राज्य स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा आवश्यक है। रणनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार, यदि राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो उसे विधायी और नीतिगत स्तर पर विस्तृत तैयारी करनी होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि उत्तराखंड सरकार इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाती है, तो उसे केंद्रीय नेतृत्व की सहमति की भी आवश्यकता हो सकती है, जैसा कि पूर्व में समान नागरिक संहिता जैसे मामलों में देखा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर उठाई गई मांग संबंधित विधायक का निजी विचार है, जिसे अध्यक्ष के माध्यम से सरकार के समक्ष रखा गया है। इस विषय पर अभी और व्यापक वैचारिक मंथन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर सरकार सजगता से कार्य कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सांस्कृतिक आधार सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि धामी सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए संकल्पित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड को पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति में नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर विधायक द्वारा उठाए गए प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी इस विषय पर गंभीरता से मंथन करेगी और देवभूमि के हित में अपने संकल्पों को आगे बढ़ाएगी।


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