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मप्र विधानसभा में आधी रात को खुला सचिवालय, जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप, राजेंद्र भारती की विधायकी पर संकट

Date : 03-Apr-2026

 भोपाल, 03 अप्रैल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार देर रात एक असामान्य और राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाक्रम देखने को मिला। देर रात विधानसभा सचिवालय खुलने की खबर फैलते ही सियासी हलचल तेज हो गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रात करीब 11 बजे अचानक विधानसभा पहुंचे। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद थे।

विधानसभा पहुंचते ही पटवारी सीधे प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के चेंबर में पहुंचे। यहां उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए देर रात विधानसभा सचिवालय खोला गया है। पटवारी ने इसे भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर की जा रही कार्रवाई बताया। कांग्रेस नेताओं के पहुंचने पर सचिव थोड़ी देर में ऑफिस से चले गए।

देर रात बढ़ी हलचल, कांग्रेस ने उठाए सवाल

सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के फैसले के बाद देर रात करीब साढ़े 10 बजे विधानसभा सचिवालय में गतिविधियां शुरू हुईं। प्रमुख सचिव के पहुंचने के बाद सचिवालय खोला गया और विधायक की सीट रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया पर काम शुरू होने की चर्चा रही। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता सक्रिय हो गए। पहले पीसी शर्मा पहुंचे और कुछ ही देर बाद जीतू पटवारी भी वहां पहुंच गए। दोनों नेताओं ने अधिकारियों से सवाल किया कि आधी रात को विधानसभा क्यों खोली गई। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं के पहुंचने के कुछ समय बाद प्रमुख सचिव वहां से निकल गए। इसके बाद बाहर आकर पटवारी ने मीडिया से कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है।

क्या है पूरा मामला: एफडी फर्जीवाड़े में सजा

दरअसल, दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एफडी फर्जीवाड़े के मामले में 3 साल की सजा सुनाई है। यह मामला उस समय का है जब वे जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे।

आरोपों के अनुसार:

बैंक के रिकॉर्ड और एफडी दस्तावेजों में हेरफेर की गई

अवधि और ब्याज दर में बदलाव कर अवैध लाभ लिया गया

लगभग लाखों रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त किया गया

सजा के बाद भी राहत

कोर्ट ने इस मामले में भारती के साथ एक अन्य आरोपी को भी दोषी ठहराते हुए जुर्माना लगाया है। हालांकि कोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही कुछ राहत भी दी है। कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाने के साथ ही उन्हें जमानत दे दी है, जिससे उन्हें तुरंत जेल नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि कानून के मुताबिक, 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन अभी राजेंद्र भारती के पास कुछ विकल्प मौजूद है। जिसमें वे अपनी सजा को चुनौती दे सकते हैं।



जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि “राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए भाजपा के इशारे पर रात में ही विधानसभा सचिवालय खोला गया है।” वहीं पीसी शर्मा ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधानसभा चलनी चाहिए थी तब नहीं चलाई गई, लेकिन अब आधी रात को कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

आगे की रणनीति और कानूनी लड़ाई

भारती परिवार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वे जल्द ही हाई कोर्ट में अपील करेंगे। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा पैरवी कर सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, चूंकि मामला आपराधिक प्रकृति का है, इसलिए राहत मिलना आसान नहीं होगा। अब अंतिम फैसला उच्च न्यायालय के रुख पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक महत्व भी बड़ा

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था। ऐसे में यह पूरा घटनाक्रम केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक असर वाला भी माना जा रहा है।


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