03 अप्रैल वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 में किए गए सुधार कानूनों को सरल बनाने और अनुपालन के बोझ और जुर्माने के डर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आज नई दिल्ली में विधेयक पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य आम जनता को नियंत्रित करना नहीं बल्कि उन्हें लाभ पहुंचाना और जीवन और व्यापार में सुगमता के लिए विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देना है। श्री गोयल ने कहा कि जन विश्वास विधेयक के माध्यम से पहली बार 79 अधिनियमों के अंतर्गत एक हजार अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक विकसित भारत 2047 की दिशा में देश की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
श्री गोयल ने कहा कि यह कानून नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आम आदमी, छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों पर दिखाए गए भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 12 राज्यों ने पहले ही जन विश्वास कानूनों के अपने-अपने संस्करण लागू कर दिए हैं और अन्य राज्यों से भी छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर विचार करने का आग्रह किया। मंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि यह कदम उस औपनिवेशिक मानसिकता से दूर जाने के लिए उठाया गया है जहां न्याय से ऊपर सजा को प्राथमिकता दी जाती थी। श्री गोयल ने यह भी कहा कि इन सुधारों से न्यायपालिका को काफी राहत मिल सकती है, जिसके पास वर्तमान में ऐसे छोटे-मोटे अपराधों से संबंधित 5
