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महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर विश्व मंथन : मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री समेत सुरेशसोनी और विद्वान हुए शामिल

Date : 03-Apr-2026

 भोपाल, 03 अप्रैल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है, जहां ‘समय’ को लेकर विज्ञान और सनातन की साझा दृष्टि पर गंभीर चर्चा शुरू हुई ।

वसंत विहार स्थित नवनिर्मित अत्यधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रख्यात चिंतक सुरेश सोनी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह दृश्य अपने आप में प्रतीक था, उस समय का, जहां शासन, ज्ञान और संस्कृति एक साथ मिलकर भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया, सीआरटीएल के डायरेक्टर जनरल के.एस. मुरली, एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर जनरल अनिल कोठारी, नेशनल कोऑर्डिनेटर डॉ. गंती एस. मूर्ति तथा विद्वान शिव कुमार शर्मा सहित देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

यह आधुनिक साइंस सेंटर जिसे 15.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के मानचित्र पर नई पहचान दी है। इसमें केंद्र सरकार ने 6.50 करोड़ और राज्य सरकार ने 8.56 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह केंद्र अब विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए अत्यधुनिक सुविधाओं से युक्त एक सशक्त मंच के रूप में उभर रहा है।

सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। यहां समय की अवधारणा, जिसे भारतीय दर्शन में ‘महाकाल’ कहा गया है को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो से जुड़े वैज्ञानिकों के साथ-साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इस विमर्श में भाग लेकर वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।

युवाओं और विद्यार्थियों के लिए यह आयोजन विशेष रूप से प्रेरणादायक साबित हो रहा है। सेटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ रही हैं। डोंगला में आयोजित डीप स्काई ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम प्रतिभागियों को ब्रह्मांड के रहस्यों से रूबरू करा रहा है।

इसी मंच से विकास की नई परियोजनाओं का भी श्रीगणेश हुआ। उज्जैन सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। साथ ही 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा ने पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

उक्त आयोजन में वक्ताओं ने कहा कि भारत अपनी प्राचीन जड़ों को थामे हुए आधुनिक विज्ञान के साथ आगे बढ़ रहा है। उज्जैन में महाकाल की उपस्थिति में ‘समय’ पर हो रहा यह वैश्विक मंथन देश और पूरी दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यहां आस्था और विज्ञान का जो संगम हुआ है, वह आने वाले समय में मानवता के लिए नई समझ और नई राहें तैयार करेगा।

उन्होंने कहा कि साइंस सेंटर विशेष रूप से हमारे युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच बनेगा। इससे नई पीढ़ी को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने, शोध की ओर प्रेरित होने और अपने कौशल को विकसित करने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत के साथ आधुनिक विज्ञान का यह समन्वय युवाओं को ज्ञान और संस्कार, दोनों से समृद्ध करते हुए 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। इस महत्वपूर्ण लोकार्पण पर विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने और रुचि रखने वाले सभी युवा साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।


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