रायगढ़ 01 जून । महलोई में दाे जून काे होने वाली जनसुनवाई से पहले एनटीपीसी लिमिटेड लारा परियोजना के तीसरे चरण के विस्तार को लेकर प्रभावित गांवों में असंतोष और चिंता का माहौल गहरा गया है। परियोजना की क्षमता 4800 मेगावाट तक बढ़ाने के लिए दो नई 800-800 मेगावाट इकाइयों के प्रस्ताव ने भूमि अधिग्रहण, रोजगार और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीनें लगातार ली जा रही हैं, लेकिन बदले में स्थायी रोजगार और समुचित पुनर्वास के वादे अब तक पूरी तरह पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में विस्तार योजना को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सबसे बड़ी चिंता फ्लाई ऐश प्रदूषण को लेकर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले से ही क्षेत्र प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है और नई इकाइयों के शुरू होने के बाद इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ सकती है। ग्रामीणों को आशंका है कि इसका असर खेती, जलस्रोतों और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
2 जून की जनसुनवाई में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि विकास के नाम पर जमीन देने वाले ग्रामीणों को आखिर रोजगार, पुनर्वास और प्रदूषण से सुरक्षा की क्या गारंटी मिलेगी।
