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गुजरात की भौगोलिक स्थिति और प्रोएक्टिव पॉलिसी मेकिंग राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का केंद्र बनाएगी : मुख्यमंत्री

Date : 12-Jan-2024

 गांधीनगर, 12 जनवरी । वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के 10वें संस्करण के तीसरे दिन शुक्रवार को गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में ‘गुजरात- द ग्रीन हाइड्रोजन डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में गुजरात देश का ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए एक विशेष लैंड पॉलिसी बनाई है और कच्छ एवं बनासकांठा जिले में 2 लाख हेक्टेयर की बंजर भूमि आवंटित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने देश में फ्यूचरिस्टिक एनर्जी की मांग को पूरा करने के लिए क्लीन और ग्रीन एनर्जी के माध्यम से ग्रीन ग्रोथ पर जोर दिया है। गुजरात प्रधानमंत्री के इस विजन के अनुरूप ग्रीन ग्रोथ के लिए प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य से अगले पांच वर्षों के लिए ग्रीन ग्रोथ सेक्टर के लिए 2 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। दुनिया में ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन पर बोझ को कम करने के विषय में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, हमें मानव जाति के कल्याण के लिए एनर्जी अल्टरनेटिव यानी वैकल्पिक ऊर्जा की तलाश करनी होगी। ग्रीन हाइड्रोजन के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और नेट जीरो, इन तीनों ही लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘गुजरात- द ग्रीन हाइड्रोजन डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ सेमिनार के जरिए प्राप्त नई टेक्नोलॉजी और पॉलिसी फ्रेमिंग के सुझाव राज्य के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे तथा गुजरात को भारत की ऊर्जा समृद्धि का द्वार बनाने में सहायक बनेंगे।गुजरात के ऊर्जा मंत्री कनुभाई देसाई ने कहा कि देश के सबसे लंबे समुद्र तट के साथ जल मार्ग, गुजरात की भौगोलिक स्थिति, गुजरात सरकार की नीति विषयक सक्रियता और संतुलित नेतृत्व के साथ उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का कमिटमेंट जैसी बातें गुजरात को अन्य के मुकाबले एक विशेष स्थान प्रदान करता है। नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से शुरू किए गए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अधिकतम योगदान देगा। भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव भूपेंद्र सिंह भल्ला ने गुजरात सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को विकसित करने की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में गुजरात देश में एक रोल मॉडल के रूप में उभर रहा है। गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग की प्रधान सचिव ममता वर्मा ने गुजरात की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता के संबंध में विस्तार से बात की, साथ ही उन्होंने गुजरात में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन के लिए विकसित हो रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी देते हुए गुजरात में निवेश के लिए सभी का स्वागत किया।

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के ऊर्जा क्षेत्र कार्यालय के वरिष्ठ निदेशक प्रियंता विजयतुंगा ने विस्तार से बताया कि गुजरात में ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को विकसित करने में एडीबी किस तरह गुजरात की सहायता कर रहा है। नार्वे के ग्रीन हाइड्रोजन ऑर्गेनाइजेशन के ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपमेंट प्लान के अध्यक्ष एरिक सोल्हेम ने गुजरात के पास भारत का ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने की क्षमता और उसके विभिन्न पहलुओं के बारे में विशेष जानकारी दी। सेमिनार की शुरुआत में गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लि. (जीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक अरुण महेश बाबू ने सेमिनार के महत्व को लेकर विस्तार से जानकारी दी। जबकि गुजरात ऊर्जा विकास निगम लि. के प्रबंध निदेशक जयप्रकाश शिवहरे ने उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त कर यह विश्वास व्यक्त किया कि गुजरात ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल की उपस्थिति में, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले और गुजरात सरकार; जीएसपीसी और गिफ्ट सिटी; एनटीपीसी और जीएसपीसी, साथ ही जीएसपीसी और जीपीसीएल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। सेमिनार के अंतर्गत आयोजित पैनल चर्चा सत्र में विषय के विशेषज्ञों ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, उसकी वैल्यू चेन, आर्थिक अवसरों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए उभरती टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चिंतन एवं मंथन किया। इस पैनल चर्चा में नार्वे के ग्रीनस्टाट हाइड्रोजन के चेयरमैन स्टर्ली पेडरशन, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के महानिदेशक अभय बकरे, अदाणी ग्रुप के ग्रीन हाइड्रोजन के सीईओ रजत सकसेरिया सहित अन्य विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।


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