नई दिल्ली, 08 दिसंबर (हि.स.)। जिम्बाब्वे नेशनल असेंबली के अध्यक्ष एडवोकेट जैकब मुडेंडा के नेतृत्व में वहां के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को संसद भवन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए धनखड़ ने कहा कि उन्होंने एक सुदृढ भ्रातृत्व की भावना साझा की है क्योंकि उन्हीं की भांति आगंतुक प्रतिनिधिमंडल के नेता पेशे से एक वक़ील हैं और एक प्रांत के पूर्व राज्यपाल भी हैं। उपराष्ट्रपति ने यह आशा व्यक्त की कि ज़िम्बाब्वे के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने में मदद मिलेगी।
यह देखते हुए कि भारत और ज़िम्बाब्वे सच्चे मित्र और वास्तविक साझेदार हैं, उपराष्ट्रपति और ज़िम्बाब्वे की नेशनल असेंबली के स्पीकर, दोनों ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक शांति और सुरक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पारस्परिक प्रतिबद्धता को दोहराया।
उपराष्ट्रपति ने हाल के समय में देश की उपलब्धियों और देश की रूपरेखा का सिंहावलोकन प्रस्तुत करते हुए, अतिथि प्रतिनिधिमंडल के साथ यह विचार साझा किया कि भारत ने कोविड-19 महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी महत्त्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष रूप से 1.3 बिलियन लोग जो मानवता का 1/6 हिस्सा हैं को शामिल करने वाले वैज्ञानिक और डिजिटल दृष्टिकोण सहित कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में देश की प्रगति के बारे में उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने भारत आए प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि भारत को जी-20 की अध्यक्षता एक ऐसे उपयुक्त समय में प्राप्त हुई है जब भारत वैश्विक चिंताओं को दूर करने की दिशा में प्रभावी नेतृत्व प्रदान कर सकता है और देश की महान संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर सकता है।
ज़िम्बाब्वे नेशनल असेंबली के स्पीकर ने महात्मा गांधी के आदर्श नेतृत्व और अहिंसा संबंधी उनके दर्शन द्वारा पोषित दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। स्थायी शांति और सुरक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, भारत आए प्रतिनिधिमंडल के नेता ने उपराष्ट्रपति से आग्रह किया कि जी-20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत को जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए विकसित देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति को मजबूत करने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी परिपक्व कूटनीति के बल पर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्षों का स्थायी समाधान खोजने में अग्रणी भूमिका निभाने की अच्छी स्थिति में है।
दोनों नेताओं ने माना कि विकास को समावेशी होना चाहिए, जिसमें समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों का समावेशन हो। भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में रहने वालों की पहुँच में सुधार के लिए सभी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। ज़िम्बाब्वे नेशनल असेंबली के स्पीकर ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पैठ बढ़ाने के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति और ज़िम्बाब्वे नेशनल असेंबली के स्पीकर दोनों ने कोविड महामारी की लहर के दौरान कुछ देशों द्वारा वैक्सीन राष्ट्रवाद की प्रथा का अनुसरण किए जाने की निंदा की और एक महान मानवीय पहल के रूप में भारत की वैक्सीन कूटनीति की सराहना की। महामारी के दौरान फ़ार्मास्युटिकल क्षेत्र द्वारा किये गए योगदान और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भारतीय जेनेरिक दवाओं की प्रभावकारिता की प्रशंसा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया की फ़ार्मेसी है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि हमारी दोनों संसदें अपने-अपने लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं और उनके जीवन और आजीविका को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
