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तमिल अस्मिता के नाम पर नकारात्मक राजनीति कर रहे राहुल गांधीः भाजपा

Date : 14-Jan-2026

 नई दिल्ली, 14 जनवरी। तमिलनाडु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार ऐसे बयान देते हैं जो समाज को बांटने और क्षेत्रीय पहचान को लेकर भ्रम फैलाने वाले हैं। राहुल गांधी तमिल अस्मिता के नाम पर नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा, "राहुल गांधी तमिलनाडु की राजनीतिक यात्रा पर थे। इस दौरान उन्होंने बेहद ही शर्मनाक और पीड़ादायक बयान दिया, जिसका वास्तविकता से, तर्कों से और तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। वहां राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी तमिल आवाज को दबाने का काम करते हैं।"

गुरु प्रकाश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पिछले 11 वर्षों में जैसी संवेदनशीलता तमिल भाषा के प्रति, तमिल संस्कृति के प्रति प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई है, ऐसा आज से पहले कभी नहीं हुआ। हमारे इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब तमिल भाषा, तमिल सम्मान और तमिल अस्मिता की संवेदनशीलता भारत के सीमाओं के अंदर ही नहीं, बल्कि हर वैश्विक मंचों पर सम्मान एवं संवेदनशीलता के साथ मोदी जी ने तमिल अस्मिता का प्रतिनिधित्व मजबूती से करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब बिहार में जाते हैं तो जाति के नाम पर उन्माद फैलाने का प्रयास करते हैं। तमिलनाडु में जाते हैं तो तमिल अस्मिता के नाम पर नकारात्मक राजनीति करने का काम करते हैं। ये कभी जाति के नाम पर, कभी क्षेत्र के नाम पर, कभी अस्मिता के नाम पर अपनी राजनीतिक तांडव का प्रस्तुति करते रहते हैं। यहअत्यंत ही असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि काशी क्षेत्र, संसद, फ़िजी, ह्यूस्टन विश्वविद्यालय और जी20 जैसे वैश्विक मंच- ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो तमिल सभ्यतागत विरासत के प्रति हमारी अतुलनीय प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का रिकॉर्ड बेहद कमजोर रहा है। बिहार दौरे में उन्होंने लोगों को जाति के आधार पर बांटने का प्रयास किया। तमिलनाडु में उन्होंने तमिल पहचान को कमज़ोर करने जैसा व्यवहार किया। उनके कार्य भारतीय राजनीति में अलगाववाद का एक पाठ्यपुस्तक-सरीखा उदाहरण और केस स्टडी प्रस्तुत करते हैं। उन्हें ऐसे बयान देने से परहेज़ करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में फ़िजी जैसे देशों में तमिल भाषा के पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। पिछले 80 वर्षों में पहली बार फ़िजी में तमिल भाषा का कार्यक्रम शुरू किया गया है।


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