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विहिप ने पाकिस्तान-बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार को लेकर संयुक्त राष्ट्र से लगाई गुहार

Date : 27-Apr-2026

 नई दिल्ली, 27 अप्रैल । विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर गहरी चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की है।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक को पत्र लिख कर दोनों देशों में विशेष रूप से हिंदू, सिख, बौद्ध और ईसाई समुदायों के साथ हो रहे उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और हिंसा के मामलों को उजागर किया है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोमवार को मीडिया को जारी पत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र की हालिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों की टिप्पणियों का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान में नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और विवाह के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। इन मामलों में अधिकांश पीड़ित महिलाएं हिंदू और ईसाई समुदाय से संबंधित हैं। विशेष रूप से सिंध प्रांत में ऐसी घटनाएं अधिक सामने आई हैं। पीड़ितों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में पाकिस्तान की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिक्रिया भी कई बार अपर्याप्त बताई गई है।

पत्र में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा और भेदभाव के अनेक मामलों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2024 के दौरान ही बड़ी संख्या में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया। आलोक कुमार ने कहा कि इन घटनाओं की निरंतरता और व्यापकता यह संकेत देती है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी है कि वे इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं।

विहिप ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों पर हिंसा की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच, पीड़ितों की सुरक्षा व न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष तंत्र की स्थापना, संबंधित देशों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप जवाबदेही तय करना तथा महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी और संस्थागत उपाय लागू करना शामिल है। विहिप ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि प्रभावित समुदायों के जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और अधिकारों की रक्षा हो सके।


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