छह विपक्षी दलों के शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट नहीं घटाया
नई दिल्ली, 15 दिसंबर (हि.स)। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें वैश्विक स्तर के दाम के मुकाबले कम है। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क कम किया लेकिन छह राज्यों ने वैट नहीं घटाया। विपक्षी दलों के सदस्यों को अपनी- अपनी पार्टी वाले शासित राज्यों में वैट कम कराना चाहिए, ताकि इसकी कीमतें कम हो सकें। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने लोकसभा में कही।
हरदीप पुरी ने गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सांसद के. मुरलीधरन के पूरक सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पिछले आठ साल में पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बहुत कम वृद्धि हुई है, जो 1974 के बाद सबसे कम बढ़ोतरी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम ज्यादा होने से देश की तेल विपणन कंपनियों को 27,276 करोड़ का घाटा हो चुका है।
पेट्रोलियम मंत्री ने विपक्षी सदस्यों की टोकाटाकी के बीच सदन में कहा कि पश्चिम बंगाल समेत 6 राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट कम नहीं किया जबकि कई भाजपा शासित प्रदेशों सहित कुछ राज्यों ने इसे कम किया है। पुरी ने कहा कि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें उत्पादन लागत, परिवहन लागत, बीमा शुल्क और मुद्रा विनिमय दर के आधार पर तय होती हैं। इसमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों का वैट तथा डीलर के हिस्से का मुनाफा भी शामिल होता है।
हरदीप पुरी ने कहा कि भाजपा शासित कई राज्यों ने वैट में कटौती की है लेकिन कुछ राज्य प्रति लीटर पेट्रोल पर 17 रुपये का वैट लेते हैं, जबकि कुछ राज्य 32 रुपये वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश ने वैट में कटौती नहीं की। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि वे अपनी राज्य सरकारों से कहें कि वैट कम कर दें तो आपके यहां भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल का भाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 फीसदी बढ़ा लेकिन भारत में दो फीसदी ही बढ़ा है।
