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हिंसा प्रभावित मणिपुर में सेना ने संभाला मोर्चा, 4000 लोगों को शिफ्ट किया गया

Date : 04-May-2023

 नई दिल्ली, 04 मई । मणिपुर के कई जिलों में हिंसा भड़कने के बाद हालात को काबू करने के लिए भारतीय सेना को बुलाया गया है। कई इलाकों में आर्मी जवानों को तैनात किया गया है। एहतियात के तौर पर अगले कुछ दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए कार्यवाही चल रही है। अब तक करीब 4 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

मणिपुर में आदिवासी आंदोलन के दौरान बुधवार को कई जिलों में हिंसा भड़क गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने अगले पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। इसके अलावा इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम, बिष्णुपुर, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। आदेश में बताया गया कि राज्य में ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू हैं।

मणिपुर सरकार के गृह मंत्री एचजी प्रकाश ने कहा कि असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर नफरत भरे भाषणों और वीडियो प्रसारित कर रहे हैं, जिससे जनता को उकसाया जा रहा है, इसी वजह से सरकार ने मोबाइल डेटा सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया।

इसके बावजूद बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए नागरिक प्रशासन के अनुरोध पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। भारतीय सेना ने एक बयान में कहा कि मणिपुर में प्रशासन के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए तीन मई की शाम से सभी प्रभावित इलाकों में सेना और असम राइफल्स की तैनाती कर दी गई है। हिंसा प्रभावित इलाकों से अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाने और कानून व्यवस्था बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मणिपुर में हिंसा को कम करने के लिए सेना और असम राइफल्स आगे बढ़ी हैं। अब तक 4000 ग्रामीणों को विभिन्न स्थानों पर सेना और राज्य सरकार के परिसरों में आश्रय दिया गया। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

क्यों भड़की हिंसा

मैतेई समुदाय को एसटी श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को रैली का आयोजन हुआ था। ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर ने इस रैली का आयोजन किया था। इस दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने कई घरों में तोड़फोड़ की है। रैली में हजारों आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान तोरबंग इलाके में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा भड़क गई। इसके बाद कई और जिलों में भी हिंसा की खबरें आई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।


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