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ये अपने आपको आज इंसाफ के पुजारी बताते हैं। आप बताइए गिरिजा टिक्कू और सरला भट्ट को कब इंसाफ मिलेगा। उनकी आवाज भारत की आवाज नहीं है। उनकी आवाज भारत की आवाज नहीं थी। इन्होंने कहा कि वो घूमे। 84 के दौरान मुझ जैसे लोग इस राजधानी में थे। एक पत्रकार ने लिखा कि सिख बच्चों के अंगों को काटकर उनकी मां की मुंह में ठूंसा गया। सुल्तानपुरी में एक महिला ने हलफनाफा दिया है कि मेरे मर्द को मार दिया और उसकी बेटी के साथ रेप किया गया। आज ये भारत की बात करते हैं। कहते हैं कश्मीर से कन्याकुमारी तक 130 दिन चल रहे थे। तो मैं जोड़ों के दर्द पर बात नहीं करूंगी। जिन वादियों में गोलियों में की आवाजें हर रोज सुनाई दे रही थी, वहां शांति थी।
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मणिपुर हमारे देश का अभिन्न अंग है। न कभी अलग था और न होगा। मैं आज गांधी खानदान और कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहती हूं। अगर दम हैं तो अपने पार्टनर को मुंहतोड़ जवाब दे। कांग्रेस के एक नेता ने कोर्ट में जाकर कह दिया कि कश्मीर में जनमत संग्रह तलाशना चाहिए। हमारे राष्ट्र के संसदीय इतिहास में आजतक भारत मां की हत्या की बात करने वाले कभी भी बैठकर मेज नहीं थपथपाते। कांग्रेसियों ने बैठकर मां की हत्या के लिए मज थपथपाई है।
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आप इंडिया नहीं है। आप वंशवादी हैं। वंशवादी भारत छोड़ो। आपकी पीठ पर आपके आसन पर जिस प्रकार का आक्रामक बर्ताव देखा गया उसका मैं खंडन करती हूं। पहली बार राष्ट्र के इतिहास में भारत मां की हत्या की बात की और कांग्रेस पार्टी तालियां बजाती रही। जो भारत की हत्या की बात कर कांग्रेस पार्टी ने ताली पीटी है। इस बात का संकेत पूरे देश को दिया कि मन में गद्दारी किसकी है। मणिपुर खंडित नहीं है। विभाजित नहीं है। मणिपुर देश में है। इन्हीं के सहयोगी हैं जिन्होंने कहा था कि भारत का मतलब केवल उत्तर भारत नहीं है। राहुल गांधी हिम्मत है तो इसका खंडन करें।
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