रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं कार्यपालक अधिकारी अनिल कुमार लाहोटी ने शुक्रवार को कहा कि डेडीकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) का 90 प्रतिशत निर्माण कार्य साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
सीआरबी आज डीएफसी कॉर्पोरेट कार्यालय में मुख्य महाप्रबंधक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस तथ्य की अत्यधिक सराहना की कि लगभग 2196 किमी. (77.2%) डीएफसी पहले ही चालू हो चुका है और 90% डीएफसीसीआईएल को साल के अंत तक पूरा किया जाना है।
वर्तमान में डीएफसीसीआईएल संरेखण पर प्रतिदिन 200 ट्रेनें चल रही है, जिनकी संख्या समय के साथ बढ़ाया जाना आवश्यक है। लाहोटी ने बताया कि संगठन को अपने संरेखण के साथ जीसीटी की संख्या को अधिकतम करने के लिए उदार गतिशक्ति मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।
संरक्षा और परिसंपत्ति का रख-रखाव सर्वोपरि है। चूंकि डीएफसी में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग हुआ है, इसलिए इसके गुणवत्ता के उच्चतम मानक बनाए रखे जाने चाहिए। लाहोटी ने कहा कि सभी मुख्य महाप्रबंधक जमीनी स्तर पर इसका व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण सुनिश्चित करें।
सीआरबी ने कहा कि डीएफसीसीआईएल ने नए कोरीडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) रेल मंत्रालय को सौंप दी है और मंत्रालय जल्द ही इस पर निर्णय लेगा। उन्होंने भारतीय रेलवे के लिए डीएफसीसीआईएल के महत्व पर प्रकाश डाला और डीएफसी के शेष खंडों का कार्य तेजी से पूरा करने का आह्वान किया।
डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक रवीन्द्र कुमार जैन ने डीएफसी के निर्माण में डीएफसीसीआईएल टीम, परियोजना भागीदारों और स्टेक होल्डरों के प्रयासों के बारे में अवगत कराया। बैठक में मुकुल सरन माथुर पीईडी (इन्फा) ने भी अपना संबोधन दिया। नवाचार के पहलुओं पर विशेष ध्यान देने के साथ फील्ड यूनिटों के कार्य निष्पादन की विस्तृत समीक्षा एवं मस्तिष्क मंथन इस दो दिवसीय मुख्य महाप्रबंधक सम्मेलन का आकर्षण रहा।
उल्लेखनीय है कि डीएफसी राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक लॉजिस्टिक्स की लागत को देश की जीडीपी के (लगभग) 15% से कम कर 8% तक लाना है। वर्ष 2030 तक 3000 मिलियन टन माल लदान के भारतीय रेलवे के लक्ष्य को प्राप्त करने में डीएफसी अवसंरचना का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।
