उत्तराखंड में 2 नवंबर को 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित गूंजी से आदि कैलाश तक होने वाली अल्ट्रा मैराथन की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) और होमस्टे संस्कृति को बढ़ावा देना है, ताकि बॉर्डर से लगे गांवों में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिल सके।
शुक्रवार को पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने स्थानीय प्रशासन, विभिन्न संगठनों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आयोजन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियाँ समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए और स्थानीय लोगों व टैक्सी यूनियन से सहयोग की अपील की। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने आयोजन को लेकर उत्साह दिखाया और उपयोगी सुझाव भी साझा किए।
पर्यटन सचिव ने बताया कि यह मैराथन उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल सीमांत गांवों को पर्यटन मानचित्र पर लाएगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के नए रास्ते भी खोलेगी।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के अनुरूप विंटर टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है। इस आयोजन से सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे और राज्य को साहसिक पर्यटन का एक नया केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि इस अल्ट्रा मैराथन के लिए अब तक एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण करा लिया है, जिससे आयोजन को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
